चुनाव आयोग का बड़ा यू-टर्न: विरोध के दबाव में बदला वोटर लिस्ट का फैसला, छूटे मतदाताओं के लिए विशेष अभियान
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और विपक्षी दलों के हल्ला बोल आंदोलन के बीच भारतीय चुनाव आयोग ने अपने पुराने फैसलों से पीछे हटते हुए एक बड़ा यू-टर्न लिया है। मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में गड़बड़ी और नाम कटने के विवादों के बाद आयोग ने अब विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।

20 राज्यों में फिर शुरू होगी कवायद एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 20 राज्यों में हजारों मतदाताओं के नाम गायब होने की खबरें थीं, जिसे लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) सहित कई विपक्षी संगठनों ने जेल भरो आंदोलन तक शुरू कर दिया था। भारी राजनीतिक दबाव के चलते अब चुनाव आयोग ने उन सभी 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में छूटे हुए और नए युवा मतदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का आदेश जारी किया है।

घर-घर जाकर दस्तावेजों का होगा मिलान इस अभियान को धरातल पर उतारने के लिए बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को विशेष निर्देश दिए गए हैं। बीएलओ अब घर-घर जाकर यह जांच करेंगे कि किन पात्र नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से कटे हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पुरानी लिस्ट और नई सूची का मिलान करें ताकि छूटे हुए लोगों की सटीक सूची बन सके। इसके बाद, पात्रता की पुष्टि होने पर फॉर्म-6 के जरिए उनका नाम दोबारा दर्ज किया जाएगा।

बीएलओ के लिए साप्ताहिक लक्ष्य और डेडलाइन काम में तेजी लाने के लिए आयोग ने बीएलओ को एक ठोस लक्ष्य दिया है। प्रत्येक बीएलओ को हर सप्ताह कम से कम 20 से 25 मामलों को निपटाना होगा, ताकि एक महीने के भीतर इस प्रक्रिया को पूरा किया जा सके। पूरी प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश न रहे।

पारदर्शिता के लिए राजनीतिक दलों को जोड़ा गया आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बूथ स्तर पर विशेष कैंप लगाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, बीएलओ द्वारा तैयार की गई छूटे हुए मतदाताओं की सूची अब मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ भी साझा की जाएगी, ताकि कोई भी पात्र मतदाता चुनावी प्रक्रिया से बाहर न रह जाए।

फॉर्म-6 के विवादित नियमों पर भी यू-टर्न विपक्ष के कड़े तेवरों के बाद चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 को लेकर भी अपनी नीति बदली है। 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की बैठक के बाद, फॉर्म-6 से उस अतिरिक्त घोषणा पत्र को हटा दिया गया है जिसे लेकर विवाद था। अब ईसीआईनेट (ECINET) पोर्टल पर केवल रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के तहत निर्धारित कानूनी फॉर्म ही मान्य होगा।

यह यू-टर्न सीधे तौर पर आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों और बढ़ते जन-आक्रोश का परिणाम माना जा रहा है।

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