बालाघाट में बच्चों की मौत पर राहुल गांधी का तीखा हमला, सरकार ने बताया राजनीतिक स्टंट
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बालाघाट: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट का दौरा कर उन आदिवासी परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने हालिया स्वास्थ्य संकट और कुपोषण के चलते अपने बच्चों को खो दिया है। यह दौरा क्षेत्र में व्याप्त स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की बदतर स्थिति को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया है।

अस्पताल से लेकर रोजगार तक पर उठाए सवाल पीड़ित परिवारों का दुख साझा करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दूरदराज के आदिवासी इलाकों में सरकारी तंत्र पूरी तरह विफल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की मौत केवल बीमारी का परिणाम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं, पौष्टिक आहार और रोजगार की कमी का नतीजा है।

आदिवासी अधिकारों का मुद्दा राहुल गांधी ने केवळ स्वास्थ्य सेवाओं ही नहीं, बल्कि जमीन के अधिकारों, वन अधिकार अधिनियम और मनरेगा के कार्यान्वयन पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब तक आदिवासी समाज को आर्थिक सुरक्षा और उनके अधिकारों की गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक वे कुपोषण और गरीबी के चक्र से बाहर नहीं निकल पाएंगे।

प्रशासन की चुनौतियां और भौगोलिक बाधाएं अगस्त महीने में बैहर क्षेत्र के कई गांवों में करीब 100 बच्चे बीमार पड़े थे, जिसमें से 6 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई थी। स्वास्थ्य विभाग ने तब भौगोलिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए बस्तियों तक पहुंच में मुश्किलों की बात कही थी। राहुल गांधी ने इसे प्रशासनिक लापरवाही करार देते हुए कहा कि केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है, उनका लाभ जमीन पर दिखना चाहिए।

भाजपा का पलटवार राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने इसे राजनीतिक पर्यटन करार दिया। सारंग ने कहा कि सरकार प्रभावित क्षेत्रों में राहत और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पहले से ही काम कर रही है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह संवेदनशील मुद्दों को उठाकर अपना राजनीतिक एजेंडा साधने की कोशिश कर रही है।

सियासी गरमाहट के बीच न्याय की आस एक तरफ कांग्रेस ने इसे सरकारी जवाबदेही और आदिवासी अधिकारों का मुद्दा बनाया है, तो दूसरी तरफ भाजपा सरकार इसे विपक्ष का राजनीतिक हमला बता रही है। फिलहाल, क्षेत्र के लोग अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि सरकारों की जुबानी जंग से इतर, धरातल पर उनकी बुनियादी सुविधाओं में कितना सुधार होता है।

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