बृजभूषण शरण सिंह की रहस्यमयी मुस्कान : क्या बीजेपी से दूरी बना रहे हैं दिग्गज नेता?
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लखनऊ: पिछले 24 घंटों से उत्तर प्रदेश की राजनीति का पारा अचानक चढ़ गया है। कारण हैं बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह। समाजवादी पार्टी द्वारा राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार को उतारने की चर्चा ने बृजभूषण को अचानक सुर्खियों के केंद्र में ला खड़ा किया है।

अखिलेश-बृजभूषण की केमिस्ट्री ने बढ़ाई हलचल राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि क्या बृजभूषण शरण सिंह सपा का तुरुप का इक्का बनने जा रहे हैं? इस चर्चा को उस समय बल मिला जब हाल ही में अखिलेश यादव और बृजभूषण शरण सिंह ने एक-दूसरे की सार्वजनिक रूप से तारीफ की। अखिलेश बिन सब सूना जैसे बयानों ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।

मुस्कान के पीछे का सियासी गणित एक अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत के दौरान बृजभूषण शरण सिंह के चेहरे पर दिखी हल्की मुस्कान चर्चा का विषय बनी हुई है। आमतौर पर अपनी गंभीर छवि के लिए जाने जाने वाले नेताजी ने जब अखिलेश यादव का नाम लिया, तो उनके चेहरे पर मुस्कान साफ देखी गई। जानकार इसे महज शिष्टाचार नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

खुद को बीजेपी से अलग दिखाने की कोशिश? सबसे हैरान करने वाली बात 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव पर उनकी टिप्पणी रही। बृजभूषण ने दोटूक कहा कि वह चुनाव तो लड़ ही नहीं रहे हैं। बीजेपी के एक ऐसे नेता, जिनके परिवार का रसूख पार्टी में गहरा है और जिनके बेटे खुद सांसद हैं, उनका ऐसा बयान हैरान करने वाला है। बीजेपी का छोटा कार्यकर्ता भी जहां चुनावों की तैयारियों में जुटा है, वहीं बृजभूषण का खुद को चुनावी प्रक्रिया से अलग थलग दिखाना कई सवाल खड़े कर रहा है।

अखिलेश से व्यक्तिगत संबंध, राजनीति अलग सपा में शामिल होने की चर्चाओं पर बृजभूषण ने बड़ी चतुराई से जवाब दिया। उन्होंने कहा, हमारे और उनके (अखिलेश) व्यक्तिगत संबंध हैं। मैं सपा में रह चुका हूं, वे अच्छे व्यक्ति हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अभी भी भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा हैं।

क्या संकेत दे रहे हैं बृजभूषण? बृजभूषण का यह संतुलित रुख उन्हें बीजेपी और सपा दोनों तरफ गुंजाइश रखने में मदद कर रहा है। वे न तो पूरी तरह से कमान संभाल रहे हैं और न ही पार्टी से किनारा कर रहे हैं। फिलहाल, यह साफ है कि बृजभूषण शरण सिंह की यह खामोशी और उनकी मुस्कान आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसी बड़े उलटफेर का संकेत हो सकती है।

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