मणिपुर 2027: बिष्णुपुर की 6 सीटों पर टिकी हैं सबकी नजरें, क्या बरकरार रहेगा सत्ताधारी गठबंधन का दबदबा?
News Image

मणिपुर में फरवरी 2026 में नई सरकार के गठन के बाद राज्य का सियासी पारा बढ़ने लगा है। साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए बिष्णुपुर जिला राजनीतिक रूप से सबसे अहम केंद्र बनकर उभरा है। इंफाल घाटी से सटे इस जिले की छह सीटों का परिणाम राज्य की सत्ता की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होता है।

साक्षरता और सामाजिक बुनावट

2011 की जनगणना के अनुसार, बिष्णुपुर जिले की आबादी लगभग 2.37 लाख है। यहां का लिंगानुपात 999 प्रति हजार पुरुष है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। जिले में साक्षरता दर 80 प्रतिशत है। सामाजिक संरचना की बात करें तो यहां 74 प्रतिशत हिंदू, 16 प्रतिशत सनामही और 8 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। अनुसूचित जनजाति की संख्या यहां मात्र 1 प्रतिशत होने के कारण जिले की सभी छह सीटें सामान्य श्रेणी में आती हैं।

2022 का जनादेश: भाजपा-एनपीपी का बोलबाला

पिछले विधानसभा चुनाव में बिष्णुपुर की सभी छह सीटों पर भाजपा और नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) का कब्जा रहा। नांबोल, बिष्णुपुर और थंगा सीट भाजपा ने जीती, जबकि ओइनम और मोइरांग में एनपीपी ने जीत दर्ज की। कुम्बी सीट भी भाजपा के खाते में गई थी। 2017 के बाद से इस जिले में कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों का प्रभाव काफी कमजोर हुआ है।

सत्ता का बदलता स्वरूप: राष्ट्रपति शासन से नई सरकार तक

मई 2023 की जातीय हिंसा ने मणिपुर की राजनीति को झकझोर कर रख दिया था। फरवरी 2025 में एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में एक साल तक राष्ट्रपति शासन रहा। फरवरी 2026 में यमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में नई सरकार बनी, जिसमें सामाजिक संतुलन के लिए दो उपमुख्यमंत्रियों को भी नियुक्त किया गया।

कुम्बी सीट का पेचीदा इतिहास

जिले की कुम्बी विधानसभा सीट पर सबकी निगाहें हैं। यहां 2022 में भाजपा और जेडीयू के बीच कांटे की टक्कर थी, जहां जीत का अंतर महज 372 वोट था। चुनाव याचिका के चलते यह सीट फिलहाल खाली है, जिससे 2027 से पहले यहां का मुकाबला राज्य के लिए एक लिटमस टेस्ट की तरह होगा।

2027 के प्रमुख चुनावी मुद्दे

आने वाले चुनावों में शांति बहाली, विस्थापितों का पुनर्वास और सामाजिक सौहार्द मुख्य एजेंडा होंगे। जहां भाजपा और एनपीपी अपने पुराने किले को बचाने की कवायद में हैं, वहीं कांग्रेस राज्यभर में संगठन को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रही है। जिले की हर सीट का अपना अलग मिजाज है—कहीं मछुआरा बिरादरी (थंगा) का दबाव है, तो कहीं व्यापारी और कृषक वर्ग (नांबोल) राजनीति की दिशा तय करते हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q: बिष्णुपुर में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं? A: जिले में कुल छह सीटें हैं: नांबोल, ओइनम, बिष्णुपुर, मोइरांग, थंगा और कुम्बी।

Q: क्या जिले में कोई सीट आरक्षित है? A: नहीं, सभी छह सीटें सामान्य श्रेणी की हैं।

Q: 2022 के चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन कैसा था? A: भाजपा ने तीन सीटें जीती थीं, जबकि गठबंधन सहयोगी एनपीपी ने दो सीटें हासिल की थीं।

Q: फिलहाल बिष्णुपुर का राजनीतिक माहौल कैसा है? A: जातीय हिंसा और राष्ट्रपति शासन के बाद, फरवरी 2026 में बनी नई सरकार के तहत शांति और विकास मुख्य मुद्दे हैं।

Q: कुम्बी सीट क्यों सुर्खियों में है? A: कानूनी विवाद के चलते यह सीट वर्तमान में खाली है और 2027 से पहले यहां का उप-चुनाव या आगामी चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाला है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

‘माफिया के सामने घुटने टेकने का दौर खत्म’: सीएम योगी ने बताया यूपी की बदली तस्वीर

Story 1

50 हजार रसगुल्लों से स्वागत, अनंत सिंह का बड़ा दावा: 500% जीतेंगे अनुज सिंह

Story 1

फ्लाईदुबई कांड का हैरान करने वाला सच: स्मित मच्छार पर क्रैश एक्स से हुआ था जानलेवा हमला

Story 1

यूपी पुलिस की हाई-टेक ताकत: सीएम योगी ने 87 इंटरसेप्टर वाहनों को दिखाई हरी झंडी

Story 1

पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर खूनी रात: एयरस्ट्राइक में 9 की मौत, बढ़ा तनाव

Story 1

आसमान में खौफ: भारतीय पायलट की बहादुरी और एक हीरो यात्री ने बचाई 180 जानें

Story 1

फ्लाईदुबई हमले के बाद पहली बार सामने आया कैप्टन स्मित मच्छार का वीडियो, मौत को मात देकर बचाई 180 लोगों की जान

Story 1

गुवाहाटी में रनों की आतिशबाजी: शुभमन गिल के दोहरे शतक और रिकॉर्ड्स के तूफान से वेस्टइंडीज पस्त

Story 1

मुश्किल हालात में अडिग रहना ही असली साहस: पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी

Story 1

मुंबई मेट्रो में लगा थूकने का डिब्बा : सुविधा या गलत परंपरा? सोशल मीडिया पर मचा बवाल