यूपी राज्यसभा चुनाव: सपा ने बिछाई बिसात, भाजपा की चुप्पी के पीछे क्या है बड़ा प्लान?
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाला चुनाव सियासी पारा बढ़ा रहा है। 16 अक्टूबर को होने वाली इस वोटिंग के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी रणनीति साफ कर दी है, जबकि सत्ताधारी भाजपा ने अपने पत्ते अभी नहीं खोले हैं।

सपा की अर्ली एंट्री और उम्मीदवार

समाजवादी पार्टी ने वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को मैदान में उतारकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। दोनों उम्मीदवारों ने नामांकन भी दाखिल कर दिया है। सपा के पास वर्तमान में 101 विधायक हैं और कांग्रेस के दो विधायकों का समर्थन मिलने पर यह संख्या 103 हो जाती है। दो सीटों के लिए उन्हें 74 वोटों की जरूरत है, जो उनके पास सुरक्षित हैं।

भाजपा की खामोशी के मायने

भाजपा खेमे में अभी भी सन्नाटा पसरा है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी करीब 20 नामों पर मंथन कर रही है, जिनमें से 8 चेहरों को अंतिम रूप दिया जाना है। भाजपा की देरी सिर्फ नाम चयन तक सीमित नहीं है; वे अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए एक मास्टरस्ट्रोक की तलाश में हैं।

गणित: 10वीं सीट का असली खेला

राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता है। विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, भाजपा और एनडीए के पास 289 विधायक हैं, जिससे उनकी 7 सीटें लगभग पक्की मानी जा रही हैं। सपा के पास दो सीटें सुरक्षित हैं। अब सबकी नजरें बची हुई 10वीं सीट पर टिकी हैं, जो भाजपा और विपक्ष के बीच क्रॉस-वोटिंग का केंद्र बन सकती है।

क्या सपा तीसरा दांव खेलेगी?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर सपा तीसरा उम्मीदवार उतारती है, तो चुनाव का पूरा समीकरण बदल सकता है। आलोक रंजन और सलीम इकबाल शेरवानी जैसे नामों को लेकर अटकलें तेज हैं। यदि सपा ऐसा करती है, तो भाजपा को अपनी 8वीं सीट सुरक्षित करने के लिए अतिरिक्त वोटों का कड़ा इंतजाम करना पड़ेगा।

चुनाव महज संसद भेजने का जरिया नहीं

यह चुनाव केवल उच्च सदन में प्रतिनिधित्व का नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले शक्ति परीक्षण का भी है। भाजपा जातीय समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। वहीं, सपा अपने सीमित संख्या बल के बावजूद गठबंधन की मजबूती का संदेश देने की कोशिश में है। 10वीं सीट का परिणाम तय करेगा कि आने वाले समय में यूपी की राजनीति किस दिशा में मुड़ेगी।

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