लोकतंत्र खतरे में: कांग्रेस का मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर बड़ा हमला, खरगे ने रखी 5 मांगें
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दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कांग्रेस के तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इस बैठक का मुख्य केंद्र चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित धांधली रही।

लोकतंत्र की नींव को खोखला कर रही मोदी सरकार बैठक के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आज भारत के सामने वैसी ही चुनौती है जैसी अंग्रेजी शासन के दौरान थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने अपने 12 वर्षों के कार्यकाल में लोकतंत्र की नींव को षड्यंत्रकारी तरीके से खोखला कर दिया है।

वोटर लिस्ट से साजिश के तहत काटे जा रहे नाम खरगे ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त मोदी सरकार की कठपुतली बन गए हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर का सपना था कि हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित रहे, लेकिन आज स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों द्वारा सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर मनमाने ढंग से वोटर लिस्ट से नाम काटे जा रहे हैं।

रक्षक ही बन गया भक्षक कांग्रेस अध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि जिस चुनाव आयोग को लोकतंत्र का चौकीदार बनाया गया था, वही अब वोटों का लुटेरा बन बैठा है। उन्होंने फॉर्म 6 के नियमों में चुपचाप किए गए बदलावों को युवाओं को मताधिकार से दूर रखने की साजिश करार दिया। खरगे ने सवाल उठाया कि जिस चुनाव आयुक्त पर उनके अपने साथी भरोसा नहीं कर पा रहे, उन पर देश कैसे विश्वास करे?

कांग्रेस की मुख्य 5 मांगें: CWC की बैठक में कांग्रेस ने अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए ये 5 मांगें रखी हैं:

  1. डेटा सार्वजनिक हो: मतदाता सूची में किए गए हर बड़े बदलाव का डेटा सार्वजनिक किया जाए।
  2. सूचना का अधिकार: जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें इसकी सूचना मिले और अपील करने का अवसर दिया जाए।
  3. पारदर्शी डेटा साझा: राजनीतिक दलों को मतदाता सूची का डेटा सरल प्रारूप में समय पर उपलब्ध कराया जाए।
  4. स्वतंत्र जांच: जहां भी विसंगतियों के प्रमाण मिलें, वहां एक स्वतंत्र और समयबद्ध जांच बिठाई जाए।
  5. प्रशासनिक पारदर्शिता: चुनाव प्रक्रिया के निर्णयों में पूरी पारदर्शिता रखी जाए ताकि किसी को जानकारी छिपाने का संदेह न हो।

सबसे शक्तिशाली आम वोटर है खरगे ने जोर देकर कहा कि चुनाव तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन संविधान और लोकतंत्र स्थायी हैं। उन्होंने जनता को संदेश दिया कि लोकतंत्र में प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री से भी ज्यादा ताकतवर एक आम वोटर होता है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि अब चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना और सरकार की जवाबदेही तय करना उनकी प्राथमिकता है।

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