अरबपति एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने अंतरिक्ष विज्ञान में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के सबसे ताकतवर रॉकेट स्टारशिप ने अपनी 14वीं टेस्ट उड़ान में पहली बार पृथ्वी की कक्षा (ऑर्बिट) तक सफलतापूर्वक पहुंचकर इतिहास रच दिया। इस मिशन के दौरान रॉकेट ने 26 स्टारलिंक सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में तैनात भी किया।
टेक्सास से भरी विशाल उड़ान 124 मीटर ऊंचे स्टारशिप-सुपर हेवी रॉकेट को अमेरिका के टेक्सास स्थित स्टारबेस से लॉन्च किया गया था। लॉन्च के कुछ ही मिनटों के भीतर, सुपर हेवी बूस्टर मुख्य यान से सफलतापूर्वक अलग हो गया। इसके बाद स्टारशिप ने अपनी आगे की यात्रा शुरू की और पहली बार किसी पेलोड (सैटेलाइट्स) को अंतरिक्ष में स्थापित करने का कारनामा कर दिखाया।
थ्रस्टर की खराबी से मिशन अधूरा योजना के अनुसार, यह मिशन करीब 10 घंटे तक चलना था और रॉकेट को भारत के ऊपर से भी गुजरना था। हालांकि, बूस्टर से अलग होने के बाद स्टारशिप के एक थ्रस्टर में तकनीकी खराबी आ गई। इस समस्या को देखते हुए स्पेसएक्स टीम ने मिशन को 3 घंटे में ही समाप्त करने का निर्णय लिया। यान को हवाई के पास प्रशांत महासागर में उतारा गया, जहां पानी को छूते ही रॉकेट में एक जोरदार धमाका हुआ।
क्यों अहम है यह मिशन? भले ही मिशन समय से पहले खत्म हो गया, लेकिन स्पेसएक्स के लिए यह एक बड़ी जीत है। पहली बार पृथ्वी की कक्षा तक पेलोड पहुंचाने से यह साबित हो गया है कि स्टारशिप भविष्य के बड़े अभियानों के लिए तैयार है। स्पेसएक्स इस रॉकेट को पूरी तरह रीयूजेबल (पुन: उपयोग योग्य) बनाने पर काम कर रहा है।
चांद और मंगल तक का सफर नासा अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस मिशन के लिए इसी स्टारशिप का उपयोग करने की तैयारी में है। इंसानों को चांद की सतह और भविष्य में मंगल ग्रह तक भेजने के लिए यह रॉकेट स्पेसएक्स का मुख्य आधार है। तकनीकी समस्याओं के बावजूद, यह टेस्ट भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरा है।
Views from of one of the first 26 Starlink V3 satellites successfully deployed to orbit by Starship
— Starlink (@Starlink) September 28, 2026
Thanks for the ride, @SpaceX! pic.twitter.com/B2SSUA0N0q
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