हाथ में तिरंगा, जुबां पर भारत माता की जय : बलूचिस्तान की 14 साल की फराह ने क्यों लगाई भारत से गुहार?
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बलूचिस्तान से उठी एक नई आवाज सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने बलूचिस्तान के हालात पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान केंद्रित कर दिया है। वीडियो में 14 साल की फराह बलूच अपनी मां के साथ नजर आ रही हैं। उनके एक हाथ में भारतीय तिरंगा है और वे नमस्ते हिंदुस्तान और भारत माता की जय के नारे लगा रही हैं।

पाकिस्तान पर गंभीर आरोप फराह बलूच ने सीधे तौर पर पाकिस्तान सरकार और वहां की सेना पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख असीम मुनीर के नेतृत्व में बलूचिस्तान के लोगों पर भीषण अत्याचार किए जा रहे हैं। फराह ने दुनिया और विशेष रूप से भारत से अपील की है कि वे बलूचिस्तान के बेजुबान लोगों की आवाज बनें।

भारत से उम्मीद क्यों? फराह का मानना है कि यदि भारत इस मुद्दे पर मुखर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बलूचिस्तान के लोगों की दबी हुई आवाज सुनी जाएगी। फराह कहती हैं, हिंदुस्तान, आपकी आवाज और समर्थन हमारे लिए बहुत मायने रखता है। हालांकि, भारत सरकार अब तक इसे लेकर एक सतर्क और नपा-तुला रुख अपनाती रही है, लेकिन अक्सर भारतीय अधिकारी बलूच लोगों की मानवीय मांगों का समर्थन करते आए हैं।

बलूचिस्तान में हिंसा की असली वजह बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा और संसाधन संपन्न प्रांत है। यहां सोने, तांबे और गैस के भारी भंडार हैं, लेकिन विडंबना यह है कि यह पाकिस्तान का सबसे पिछड़ा इलाका बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनके संसाधनों का दोहन कर लाभ पंजाब प्रांत और केंद्र सरकार ले जाती है, जबकि उन्हें गरीबी और दमन का सामना करना पड़ता है।

CPEC और असंतोष का गहराता संकट चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) और ग्वादर बंदरगाह जैसी बड़ी परियोजनाओं ने बलूचिस्तान के जख्मों को और गहरा कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये प्रोजेक्ट उनकी जमीन पर हो रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को इससे कोई खास फायदा नहीं मिल रहा है। इसके चलते बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे सशस्त्र समूह सक्रिय हो गए हैं, जो आए दिन सुरक्षा बलों और चीनी परियोजनाओं को निशाना बनाते रहते हैं।

क्या फराह की अपील रंग लाएगी? फराह बलूच की यह भावुक अपील एक ऐसे समय में आई है जब बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने वाले लोगों और सेना के दखल को लेकर तनाव चरम पर है। फराह की गुहार यह दर्शाती है कि बलूचिस्तान के आम नागरिक अब अपने अधिकारों की लड़ाई को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

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