नेपाल में कुदरत का कहर: भूस्खलन में ढहा पहाड़, 24 की मौत और 14 लापता
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नेपाल में एक बार फिर कुदरत का विकराल रूप देखने को मिला है। अगस्त के अंत में आई भीषण बाढ़ के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि मूसलाधार बारिश ने देश में तबाही मचा दी है। लगातार तीन दिनों तक हुई बारिश के चलते कई जिलों में भूस्खलन और नदियों में उफान आया है। अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 लोग अभी भी लापता हैं।

पलक झपकते ही ढहा पहाड़ आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिरता दिखाई दे रहा है। चंद सेकंड में मलबे का सैलाब घरों को अपनी चपेट में ले लेता है। यह दृश्य प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए किसी डरावने सपने जैसा है।

किन जिलों में सबसे ज्यादा तबाही? अधिकारियों के अनुसार, गंडकी प्रांत के बाग्लुंग में 10, म्याग्दी में 6, पाल्पा में 5, मनांग में 2 और धनुषा में एक व्यक्ति की जान गई है। मलबे के नीचे दबे 14 लोगों की तलाश जारी है। इनमें मनांग के 10 और म्याग्दी के 3 लोग शामिल हैं। इसके अलावा, लामजुंग समेत अन्य जिलों में कई लोग घायल हुए हैं।

747 परिवारों का उजड़ा घर राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक, 747 परिवार इससे सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। करीब 143 घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं, जबकि 435 परिवारों के 1,500 लोगों को अपना घर छोड़कर विस्थापित होना पड़ा है। परबत जिला सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 106 घर जमींदोज हो गए हैं।

पुल, बिजली और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान आपदा ने केवल घरों को ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को भी तगड़ा झटका दिया है। 6 पुल पूरी तरह बह गए हैं। बिजली ढांचे पर भी इसका गंभीर असर पड़ा है। काली गंडकी ए जलविद्युत परियोजना का उत्पादन ठप करना पड़ा है और कई ट्रांसमिशन लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे 358.2 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है।

मनांग में हिमस्खलन का कहर मनांग के नारफू क्षेत्र में हिमलुंग हिमालय के पास हिमस्खलन की घटना हुई, जिसमें दो पर्वतारोहियों की दर्दनाक मौत हो गई। खराब मौसम के कारण बचाव अभियान में भारी चुनौतियां आ रही हैं। काली गंडकी नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाते हुए कई इलाकों में कटान किया है, जिससे सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है। फिलहाल सरकार बचाव और राहत कार्यों के साथ-साथ नुकसान का आकलन करने में जुटी है।

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