बद्रीनाथ धाम में डीजे और नाच-गाने पर मचा घमासान: प्रशासन ने सेना को भेजा नोटिस, भविष्य के लिए लगाई पाबंदी
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उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में हाल ही में आयोजित सांस्कृतिक महोत्सव विवादों के घेरे में आ गया है। 19 और 20 सितंबर को मंदिर परिसर के आसपास तेज आवाज में म्यूजिक और डांस के वीडियो वायरल होने के बाद साधु-संतों और धार्मिक संगठनों ने नाराजगी जताई है। विवाद बढ़ने के बाद चमोली जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए भारतीय सेना की गढ़वाल स्काउट्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

गरिमा के खिलाफ आयोजन, प्रशासन ने मांगा जवाब चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर से स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में पूछा गया है कि बद्रीनाथ धाम जैसे पवित्र स्थान पर बिना पूर्व अनुमति के ऐसे सामूहिक आयोजन और तेज म्यूजिक का उपयोग क्यों किया गया? जिलाधिकारी ने साफ कहा कि इस तरह के कार्यक्रम मंदिर की गरिमा और वहां होने वाली दैनिक पूजा-अर्चना के विपरीत हैं।

सेना का रुख और जिला प्रशासन की सफाई जिलाधिकारी गौरव कुमार ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम का आयोजन पूरी तरह से भारतीय सेना ने वाइब्रेंट विलेज स्कीम के तहत किया था। प्रशासन की भूमिका केवल योजनाओं के प्रचार के लिए स्टॉल लगाने तक सीमित थी। इस पूरे आयोजन में प्रशासन या राज्य सरकार का कोई दखल नहीं था। वहीं, भारतीय सेना ने इस मामले पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है। सेना के प्रवक्ता का कहना है कि आधिकारिक बयान आने पर ही जानकारी साझा की जाएगी।

मुरली मनोहर जोशी ने उठाए सवाल वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने इस आयोजन को सांस्कृतिक मर्यादाओं का उल्लंघन करार दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने इस धाम को शांतिपूर्ण भजन-कीर्तन के लिए स्थापित किया था। उन्होंने कहा, जहाँ शंख बजाना भी वर्जित है, वहां नाच-गाने और शोर-शराबे वाले कार्यक्रम करना करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर आघात है।

साधु-संतों का विरोध और नए दिशा-निर्देश तीर्थ पुरोहित महापंचायत और शंकराचार्य मठ के प्रभारियों ने भी इस आयोजन को सांस्कृतिक फूहड़ता बताया है। संतों का तर्क है कि बद्रीनाथ धाम में नर-नारायण की तपस्या स्थली है, जहां शांति का पालन अनिवार्य है। विरोध को देखते हुए चमोली प्रशासन ने अब भविष्य के लिए कड़े नियम लागू कर दिए हैं। अब बद्रीनाथ धाम के आसपास किसी भी कार्यक्रम के लिए संबंधित SDM से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

धार्मिक स्थलों पर शोर पर पूर्ण प्रतिबंध विवाद के बीच उत्तराखंड सरकार ने भी बड़ा कदम उठाया है। अब बद्रीनाथ सहित चमोली जिले के सभी धार्मिक स्थलों के आसपास ध्वनि विस्तारक यंत्रों (हाई फ्रीक्वेंसी साउंड सिस्टम) के प्रयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि भविष्य में किसी भी आयोजक द्वारा धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन न हो।

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