संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू द्वारा प्रतिनिधियों को नैतिक रूप से कायर कहे जाने के बाद अब तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आइसलैंड की विदेश मंत्री थोर्गेर्दुर कैट्रीन गुन्नार्सदोतिर ने नाम लिए बगैर नेतन्याहू पर जोरदार निशाना साधा है।
कायर कौन हैं? आइसलैंड की विदेश मंत्री ने कहा, हमने इस मंच से नैतिक रूप से कायर जैसे शब्द सुने हैं। मेरे नजरिए में, नैतिक रूप से कायर वे लोग हैं जो न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए बातचीत करने से इनकार करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग ज़रूरतमंदों तक मानवीय सहायता पहुंचने से रोकते हैं और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का अनादर करते हैं, वही असल में कायर हैं।
ग़ज़ा और फिलिस्तीन पर चिंता गुन्नार्सदोतिर ने फिलिस्तीनी नागरिकों की पीड़ा को गंभीरता से उठाया। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत और परिवारों के उजड़ने को केवल एक पृष्ठभूमि की आवाज़ नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा, हमें यह मंजूर नहीं कि ग़ज़ा को बार-बार तबाह किया जाए और फिर उसे दोबारा बनाने की नौबत आए, जबकि हिंसा की मूल वजह का समाधान अब भी अनसुलझा है।
अवैध बस्तियों और हिंसा की आलोचना आइसलैंड की विदेश मंत्री ने वेस्ट बैंक में अवैध बस्तियों के विस्तार पर भी ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि वहां फिलिस्तीनी नागरिकों को बसने वालों की हिंसा का सामना करना पड़ रहा है, जिसे नीतियों और भड़काऊ बयानों से बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आइसलैंड का लक्ष्य एक ऐसा समाधान है जहां इसराइल के साथ एक टिकाऊ फिलिस्तीन राष्ट्र हो, जिसमें दोनों समुदाय गरिमा और शांति के साथ रह सकें।
क्या कहा था नेतन्याहू ने? 24 सितंबर को यूएन में भाषण के दौरान जब कई देशों के प्रतिनिधि हॉल से वॉकआउट कर गए, तो नेतन्याहू ने उन्हें नैतिक रूप से कायर करार दिया था। नेतन्याहू ने ग़ज़ा में जनसंहार के आरोपों को सिरे से खारिज किया और हमास के खिलाफ जारी युद्ध को अपनी सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने फ्रांस, ब्रिटेन और कतर जैसे देशों की भी कड़ी आलोचना की थी।
वैश्विक संकट और संप्रभुता आइसलैंड की विदेश मंत्री ने अपने भाषण में यूक्रेन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रूस का यूक्रेन पर हमला संप्रभुता को कुचलने का उदाहरण है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के उल्लंघन पर कार्रवाई नहीं हुई, तो छोटे देशों के लिए यह अस्तित्व का संकट बन जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी देश को किसी दूसरे राष्ट्र का भविष्य तय करने का अधिकार नहीं है।
H.E. Thorgerdur Katrín Gunnarsdóttir, Minister for Foreign Affairs of Iceland @UN #GeneralDebate
— Journal of the United Nations (@Journal_UN_ONU) September 26, 2026
🔗Access the recording and transcript of the statement here: https://t.co/8M7uCn8YUf#UNJournal #UNGA81
© UN Photo/Loey Felipe pic.twitter.com/LJjmcR1Wkq
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