केरल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री रमेश चेन्निथला एक बार फिर अपने बयानों के कारण विवादों के घेरे में हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में मिली हार के बाद उन्होंने चुनाव आयोग (EC) की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। हालांकि, केरल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर उनके पुराने रुख ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रभारी रहे चेन्निथला ने हार के लिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की भूमिका ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों को नुकसान पहुँचाया। चेन्निथला का कहना है कि आयोग ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है। उन्होंने दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं, जिन्हें CEC ने अनसुना कर दिया।
विवाद तब गहरा गया जब चेन्निथला से केरल में लागू SIR प्रक्रिया के बारे में पूछा गया। जहां राहुल गांधी और अन्य कांग्रेसी नेता SIR को वोट चोरी का माध्यम बता रहे हैं, वहीं चेन्निथला ने केरल में इसे एक बेहतरीन सुधार बताया था। उन्होंने सफाई दी कि केरल में उनके कार्यकर्ता सतर्क थे, इसलिए वहां धांधली नहीं हो सकी। बीजेपी ने इसे कांग्रेस का दोहरा चरित्र करार दिया है।
बीजेपी नेता सीआर केसवन ने चेन्निथला के 4 मई 2026 के उस बयान को सार्वजनिक किया है, जिसमें उन्होंने केरल में SIR की जमकर तारीफ की थी। केसवन ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस उस खिलाड़ी की तरह है, जो जीतने पर व्यवस्था को सही और हारने पर उसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताती है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस जनता के जनादेश को स्वीकार करने के बजाय अब संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर रही है।
इस सियासी खींचतान में अब शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे भी कूद पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र चुनाव से ठीक पहले 40 लाख वोटरों के नाम जोड़कर फिर हटा दिए गए, जो एक बड़ी साजिश है। उद्धव ठाकरे ने मांग की है कि यदि चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्षता साबित करनी है, तो महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में दोबारा चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं।
विवाद की जड़ में चुनाव आयुक्तों के बीच के कथित मतभेद हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मतदाता पंजीकरण और डेटा प्रबंधन से जुड़ी 14 आपत्तियां दर्ज कराई थीं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये कोई विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक कामकाज का सामान्य हिस्सा और आंतरिक फीडबैक हैं। आयोग का तर्क है कि SIR के फैसले सभी आयुक्तों की सामूहिक सहमति से लिए गए थे।
महाराष्ट्र की 288 सीटों में से महायुति गठबंधन ने 234 सीटों पर भारी जीत दर्ज की थी। अब चुनाव आयोग पर उठते ये सवाल आने वाले समय में एक बड़े संवैधानिक संकट की ओर संकेत कर रहे हैं।
Home minister Ramesh Chennithala says, SIR was helpful in Kerala because earlier, CPM used to provide bogus votes.
— K Surendran (@surendranbjp) September 25, 2026
So when SIR affects opponents in Keralam, it s a welcome reform. When it is implemented elsewhere, it suddenly becomes a threat to democracy.
Much like the EVM… pic.twitter.com/mnsEFG9HGE
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