25 साल की विनिता पूनिया ने ढहाया बीजेपी का किला, खाटूश्यामजी में कांग्रेस का परचम
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राजस्थान के सीकर जिले की हाईप्रोफाइल खाटूश्यामजी नगरपालिका चुनाव में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। मात्र 25 साल की युवा कांग्रेस पार्षद विनिता पूनिया ने बीजेपी के मजबूत गढ़ में सेंध लगाते हुए नगरपालिका अध्यक्ष पद पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।

कानूनी दांव-पेच और कांटे की टक्कर यह चुनाव किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था। 20 सदस्यीय नगरपालिका में बीजेपी और कांग्रेस के पास 8-8 पार्षद थे, जिससे मुकाबला निर्दलीय और अन्य दलों पर टिका था। मतदान के दौरान विवाद हुआ और मामला राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंचा। कानूनी लड़ाई के बाद जब वोटों की गिनती हुई, तो विनिता ने बीजेपी की प्रेम देवी को महज एक वोट के अंतर से हराकर जीत हासिल की।

कौन हैं विनिता पूनिया? विनिता पूनिया खाटूश्यामजी के वार्ड नंबर 11 से पार्षद हैं। उन्हें राजनीति विरासत में मिली है और वे एक सामाजिक रूप से सक्रिय परिवार से संबंध रखती हैं। वार्ड पार्षद के चुनाव में उन्होंने बीजेपी के रामगोपाल सिंहमार को 88 वोटों के भारी अंतर से हराकर अपनी ताकत दिखाई थी। धार्मिक पर्यटन, सफाई व्यवस्था और स्थानीय समस्याओं पर उनकी मुखरता ने उन्हें युवाओं और स्थानीय निवासियों के बीच लोकप्रिय बना दिया है।

सत्य की हुई जीत जीत के बाद विनिता ने कहा, यह सत्य की जीत है। मैं जनता का धन्यवाद करती हूं और वादा करती हूं कि खाटूश्यामजी की हर समस्या को हल करने का पूरा प्रयास करूंगी। अपनी टीम को एकजुट रखने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने के कारण पार्टी ने उन पर भरोसा जताया था, जिस पर वे खरी उतरीं।

शेखावाटी में कांग्रेस की नई उम्मीद सीकर जिले को शेखावाटी का दिल माना जाता है, जो परंपरागत रूप से बीजेपी का गढ़ रहा है। यहां कांग्रेस का बोर्ड बनना राज्य की राजनीति के लिए बड़े संकेत हैं। यह जीत बताती है कि राज्य में भाजपा सरकार होने के बावजूद, स्थानीय स्तर पर कांग्रेस का जमीनी नेटवर्क और विकास के मुद्दे अभी भी मतदाताओं पर प्रभाव डाल रहे हैं।

खाटूश्यामजी के लिए बड़ी चुनौती विनिता पूनिया के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र खाटूश्यामजी में बुनियादी ढांचे और भीड़ प्रबंधन को दुरुस्त करना है। प्रशासनिक ढिलाई और सफाई व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों में लंबे समय से असंतोष रहा है। अब देखना यह है कि 25 वर्षीय यह युवा चेहरा अपनी कार्यशैली से स्थानीय निकाय में बदलाव लाने में कितनी सफल होती हैं।

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