मानव इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ : ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने पीएम मोदी की कार्यक्षमता को क्यों सराहा?
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न्यूयॉर्क में चल रहे संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत ने ऊर्जा पहुंच के क्षेत्र में जो कीर्तिमान स्थापित किया है, वह मानव इतिहास में अभूतपूर्व है।

क्या बोले अल्बनीज?

एक इंटरव्यू के दौरान ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने कहा, पीएम मोदी को इसका श्रेय दिया जाना चाहिए कि उनके शासनकाल में भारत में जितने लोगों को ऊर्जा तक पहुंच मिली है, उतनी मानव इतिहास के किसी भी दशक, क्षेत्र या देश में नहीं देखी गई। अल्बनीज के अनुसार, भारत का तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का सफर इसकी बुनियादी मजबूती को दर्शाता है।

डेटा क्या कहता है?

अल्बनीज का बयान केवल प्रशंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के अनुसार, केवल वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड 52.5 गीगावाट (GW) की नई बिजली क्षमता ग्रिड में जोड़ी है। भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता अब 552 गीगावाट के आंकड़े को पार कर गई है।

हरित ऊर्जा में भारत की महाशक्ति बनने की राह

अगस्त 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 304 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन (सौर, पवन, हाइड्रो और परमाणु) क्षमता का लक्ष्य पार कर लिया है। वर्तमान में भारत की कुल बिजली क्षमता में 52% से अधिक हिस्सा स्वच्छ और हरित ऊर्जा का है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत अब दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जिसकी क्षमता 2014 के 2.8 GW से बढ़कर अब 168 GW तक पहुंच चुकी है।

आम आदमी तक ऊर्जा की पहुंच

सरकार की पीएम सूर्य घर योजना के जरिए 58 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित हुए हैं और 49 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर इंस्टॉल किए जा चुके हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत भारत में एलपीजी कनेक्शनों की संख्या 10.58 करोड़ के पार पहुंच गई है। पात्र लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सीधी सब्सिडी (DBT) दी जा रही है।

क्या ऑस्ट्रेलिया में इस पर विवाद है?

जहाँ पूरी दुनिया भारत के इस ऊर्जा विस्तार को देख रही है, वहीं ऑस्ट्रेलिया के कुछ कंजर्वेटिव धड़ों ने इस पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का तर्क है कि भारत अभी भी कोयले पर निर्भर है। हालांकि, भारत सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए अपनी स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को प्राथमिकता दी है और भारत 2030 के 500 GW हरित ऊर्जा लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है।

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