महाराष्ट्र के 74% हिस्से में सूखा: 265 तालुका प्रभावित, सरकार ने लागू किया ट्रिगर-1
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महाराष्ट्र के एक बड़े हिस्से में जहां बारिश की कमी ने संकट खड़ा कर दिया है, वहीं राज्य सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित कर दिया है। राज्य का करीब 74 प्रतिशत क्षेत्र अब आधिकारिक रूप से सूखे की चपेट में है।

राहत के लिए ट्रिगर-1 प्रबंधन लागू सरकार ने सूखा प्रबंधन संहिता 2016 के तहत ट्रिगर-1 (पहला चरण) लागू किया है। यह कदम तब उठाया जाता है जब किसी क्षेत्र में बारिश में 25 प्रतिशत से अधिक की कमी हो और लगातार 21 दिनों तक सूखा बना रहे। मुख्यमंत्री के हालिया दौरों के बाद इस आपातकालीन ढांचे को सक्रिय किया गया है।

असर वाले मुख्य जिले कृषि आयुक्त की रिपोर्ट के अनुसार, सूखे का असर 32 जिलों में देखा जा रहा है। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में सोलापुर, अहिल्यानगर, नासिक, लातूर, बीड, बुलढाणा, अमरावती, यवतमाल, नागपुर और चंद्रपुर शामिल हैं। सरकार ने जिलाधिकारियों को फसल नुकसान का आकलन करने के लिए जीपीएस आधारित सर्वे और फोटो रिकॉर्ड तैयार करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

किसानों को मिली बड़ी राहत संकट को देखते हुए सरकार ने राहत उपायों का पिटारा खोल दिया है। इसमें भू-राजस्व में छूट, फसल ऋण के नियमों को आसान बनाना और कर्ज वसूली पर रोक लगाना शामिल है। इसके अलावा, खेती में इस्तेमाल होने वाले पंपों के बिजली बिल में भी राहत दी गई है। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने स्पष्ट किया कि 7.5 हॉर्सपॉवर से अधिक क्षमता वाले पंपों के बिजली बिलों में विशेष छूट दी जाएगी।

अल नीनो और बारिश की भारी कमी राज्य में इस बार औसत सामान्य बारिश 932.3 मिमी के मुकाबले केवल 755.9 मिमी दर्ज की गई है, जो 18.8 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है। छत्रपति संभाजीनगर संभाग की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां सामान्य से 30.8 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। अल नीनो के प्रभाव ने राज्य की कृषि व्यवस्था के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

आकलन के बाद मिलेगी पूरी सहायता सरकार का कहना है कि किसानों को दी जाने वाली वास्तविक वित्तीय सहायता का निर्धारण जमीनी स्तर पर होने वाले नुकसान के आकलन के बाद किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेजी से शुरू करने पर केंद्रित है।

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