धुरंधर में दाऊद का नाम लेने से क्यों डरे मेकर्स? सामने आई अंडरवर्ल्ड के खौफ की असली सच्चाई
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फिल्म धुरंधर और धुरंधर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है। फिल्म में जिस तरह से अंडरवर्ल्ड डॉन और डी-कंपनी के नेटवर्क को दिखाया गया है, उसने दर्शकों के साथ-साथ अपराध जगत में भी हलचल मचा दी है। हालांकि, फिल्म में दाऊद इब्राहिम का नाम सीधे तौर पर न लेकर उसे बड़े साहब के रूप में पेश किया गया है।

बड़े साहब नाम के पीछे का डर खोजी पत्रकार और क्राइम ऑथर विवेक अग्रवाल ने हाल ही में इस पर बड़ा खुलासा किया है। उनका कहना है कि मेकर्स दाऊद का असली नाम लेने की हिम्मत नहीं जुटा सके। अग्रवाल के अनुसार, वो लोग पूरा नाम नहीं लेना चाहते थे, क्योंकि उन्हें पता है कि अगर ऐसा किया तो अंजाम क्या होगा।

इंसल्ट बर्दाश्त नहीं करता दाऊद विवेक अग्रवाल ने दाऊद की कार्यशैली पर बात करते हुए कहा कि डॉन किसी को भी छोड़ सकता है, लेकिन जो उसकी बेइज्जती करे, उसे वह कभी माफ नहीं करता। फिल्म में जिस तरह से डॉन के किरदार को लाचार और बीमार दिखाया गया है, उसे डी-कंपनी के सक्रिय गुट अपमान के तौर पर देख रहे हैं।

किसकी तस्वीर पर माला चढ़ेगी, यह तय है जब पत्रकार से पूछा गया कि क्या दाऊद फिल्म मेकर्स से बदला लेगा, तो उन्होंने बेहद गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, पिक्चरें कितनी बनेंगी ये तो नहीं पता, लेकिन किस-किस की तस्वीरों पर मालाएं टंगेंगी, ये मुझे जरूर पता है। यह बयान साफ तौर पर इशारा करता है कि अंडरवर्ल्ड का खतरा आज भी वास्तविक है।

आज भी एक्टिव है डी-कंपनी का सिंडिकेट अग्रवाल ने दावा किया कि अंडरवर्ल्ड खत्म नहीं हुआ है, बल्कि उसका तरीका बदल गया है। मुंब्रा और डोंगरी के इलाकों में रीडेवलपमेंट के काम का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वहां बिना डी-कंपनी की मंजूरी के एक ईंट तक नहीं रखी जा सकती। ये गैंग आज भी अपने ओवरग्राउंड वर्कर्स के जरिए पूरी तरह एक्टिव हैं।

बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड का पुराना नाता इस चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि कैसे एक समय में बॉलीवुड का पूरा फाइनेंस दाऊद गैंग संभालता था। सैयद टोपी नाम का शख्स इस नेटवर्क का मुख्य चेहरा था, जिसकी मौत पर बॉलीवुड में एक तरह से दिवाली मनाई गई थी, क्योंकि वह पूरा डेटा अपने साथ ले गया था।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहां कुछ लोग मेकर्स को डरपोक बता रहे हैं, वहीं कुछ का कहना है कि भारत सरकार और कानून व्यवस्था के सामने ऐसा अपराधी अब कुछ भी नहीं है। लोगों का मानना है कि जो खुद देश छोड़कर भागा हुआ है, उससे डरना फिल्म इंडस्ट्री की कमजोरी को दर्शाता है।

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