प्रशांत महासागर में उभरा सुपर एल नीनो दुनिया के लिए एक बड़ी आपदा का संकेत है। शिकागो विश्वविद्यालय की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की ताजा रिपोर्ट ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, अगले 6 महीनों के भीतर भीषण गर्मी के कारण भारत समेत 11 देशों में करीब 4.5 लाख लोगों की जान जाने का खतरा है।
वैश्विक तापमान में रिकॉर्ड उछाल का डर वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सितंबर 2026 से अगस्त 2027 के बीच वैश्विक तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। पिछले 20 वर्षों की तुलना में अगले छह महीनों में सामान्य से 44 प्रतिशत अधिक गर्म दिन होने की आशंका है। जलवायु परिवर्तन के कारण बिगड़े प्राकृतिक संतुलन ने एल नीनो को और भी घातक बना दिया है।
भारत पर कितना बड़ा खतरा? इस शोध के मुताबिक, भारत में गर्मी से जुड़ी मौतों का आंकड़ा 16,000 तक पहुंच सकता है। चिंता की बात यह है कि इनमें से करीब 7,500 मौतें केवल दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच होने का अनुमान है। भीषण गर्मी न केवल सीधे स्वास्थ्य पर असर डालेगी, बल्कि फसलों की बर्बादी, सूखे और भुखमरी जैसी स्थितियों को भी जन्म देगी।
किन देशों पर सबसे ज्यादा खतरा? रिपोर्ट में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों की सूची भी जारी की गई है। नाइजीरिया में 31,400, सूडान में 17,500, नाइजर में 10,000 और चाड में 8,000 लोगों की जान जा सकती है। इसके अलावा फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में कुल 19,400, इंडोनेशिया में 19,300 और ब्राजील में 13,300 लोगों की जान जाने का अंदेशा जताया गया है।
दिसंबर में चरम पर होगा सुपर एल नीनो विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और अमेरिका की NOAA के अनुसार, एल नीनो अभी अपनी पूरी तीव्रता पर नहीं पहुंचा है। नवंबर-दिसंबर तक यह सुपर एल नीनो में तब्दील हो जाएगा। प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फरवरी 2027 तक इस पैटर्न के बने रहने की संभावना 100 प्रतिशत है। यदि समय रहते एहतियाती कदम नहीं उठाए गए, तो यह जलवायु आपदा मानवीय इतिहास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक साबित हो सकती है।
We could be heading for a Super El Niño 🦸🌀
— UNDRR (@UNDRR) September 18, 2026
El Niño is declared when Pacific temperatures rise 0.5°C above average. Forecasts suggest 2026 could see rises of 2–3°C.
Find out how the @IFRC is getting to reduce humanitarian impacts ➡️ https://t.co/kiFAwf17SM pic.twitter.com/GkxEKJ98ii
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