वोट चोरी का आरोप: CEC के खिलाफ विपक्ष का महागठबंधन , ममता-राहुल और अखिलेश की गिरफ्तारी की मांग
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नई दिल्ली: देश की राजनीति में इस वक्त मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है। मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया में धांधली और चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों ने विपक्ष को हमलावर होने का बड़ा मौका दे दिया है।

ममता बनर्जी का तीखा हमला: बंगाल चुनाव वापस लौटाओ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि राज्य में हुए विधानसभा चुनाव ज्ञानेश कुमार की देखरेख में धांधली का शिकार हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और CEC एक जॉइंट वेंचर की तरह काम कर रहे हैं। ममता ने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए और राज्य में दोबारा चुनाव कराए जाएं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, अगर आपमें नैतिकता बची है, तो हमारा चुनाव हमें वापस लौटा दें।

राहुल गांधी का देशद्रोह वाला बयान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को सीधे संविधान पर हमला करार दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा, वोट चोरी भारत के लोगों के खिलाफ अपराध है। बीजेपी, आरएसएस और चुनाव आयोग ने मिलकर जो किया, वह देशद्रोह है। न्याय जरूर होगा। राहुल का यह बयान चुनाव आयोग के भीतर की कथित आंतरिक खींचतान की खबरों के बाद आया है।

चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक कलह की चर्चा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR प्रक्रिया से संबंधित फैसलों पर 14 औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य आयुक्तों की राय को दरकिनार कर इसे वन मैन शो बना दिया है। हालांकि, आयोग के सूत्रों का कहना है कि सभी टिप्पणियों पर विचार किया गया था और भीतर कोई मतभेद नहीं है।

अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव की चेतावनी समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र के लिए घातक बताया है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को कठपुतली बनाना लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश है। वहीं, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बिहार और बंगाल में हुए चुनावों को धांधली का परिणाम बताते हुए वहां नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है।

विपक्षी दलों की साझा मांग आम आदमी पार्टी से लेकर डीएमके तक, विपक्ष के तमाम दिग्गज नेता एक सुर में ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। डीएमके नेता टी.के.एस. एलंगोवन ने इसे एक समुदाय विशेष को निशाना बनाने की साजिश करार दिया है। पूरे देश में SIR प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोके जाने की मांग जोर पकड़ रही है, जिससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

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