न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का 81वां सत्र एक ऐसे नाजुक समय में शुरू हुआ है जब दुनिया युद्ध, आर्थिक अस्थिरता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों से घिरी है। इस वैश्विक मंथन के बीच भारत ने अपना एजेंडा साफ कर दिया है। 26 सितंबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर यूएन के मंच से भारत का पक्ष रखेंगे।
भारत का मुख्य जोर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बड़े बदलाव पर है। नई दिल्ली का स्पष्ट मानना है कि मौजूदा वैश्विक संस्थाएं आज की आर्थिक और राजनीतिक हकीकत के साथ मेल नहीं खातीं। भारत ने बार-बार इस बात को उठाया है कि विकासशील देशों को उन वैश्विक फैसलों में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए जो उनकी अर्थव्यवस्था, शांति और भविष्य को प्रभावित करते हैं।
भारत ने सुरक्षा परिषद में पहले ही कड़ा रुख अपनाते हुए आगाह किया है कि अफगानिस्तान में अल-कायदा का इकोसिस्टम फिर से जड़ें जमा रहा है। नई दिल्ली के अनुसार, अफगानिस्तान में 20 से अधिक आतंकवादी समूह सक्रिय हैं, जो न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा हैं। भारत इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर प्रमुखता से उठा रहा है ताकि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता बनाई जा सके।
इस साल UNGA की थीम भरोसा बहाल करना है। भारत ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की आवाज बनकर उभरा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि अनिश्चितता भरे इस दौर में आपूर्ति श्रृंखलाओं का टूटना और मानवीय संकट बड़ी चुनौतियां हैं। इसके अलावा, भारत ने संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में उन देशों की भूमिका बढ़ाने की मांग की है जो अपने सैनिक भेजते हैं।
महासभा में केवल संघर्ष ही नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक पर भी चर्चा होनी है। एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे मुद्दों पर भारत अपनी तकनीकी और पर्यावरणीय प्राथमिकताओं को रखेगा।
न्यूयॉर्क में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का कार्यक्रम काफी व्यस्त है। 26 सितंबर को मुख्य भाषण से पहले, वे कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। 22 से 29 सितंबर तक चलने वाले इस हाई-लेवल वीक के जरिए भारत अपनी बढ़ती वैश्विक भूमिका और जिम्मेदारियों को मजबूती से पेश करेगा।
#WATCH | US | At the High-Level Meeting of Like-Minded Global South countries and Friends, EAM Dr S Jaishankar said, We are meeting at a time of considerable global uncertainty. We can see that in conflicts and geopolitical tensions, in the disruption of supply chains, in… pic.twitter.com/uYrwEK6N0d
— ANI (@ANI) September 23, 2026
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