दिल्ली सरकार ने धार्मिक मान्यताओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक अनूठा संतुलन बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि राजधानी के मंदिरों के पास अब खंडित मूर्ति संग्रह केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
क्या है नई योजना? अक्सर लोग पुरानी या टूट चुकी मूर्तियों और पूजा सामग्री को लेकर असमंजस में रहते हैं कि इन्हें कहां विसर्जित करें। नई व्यवस्था के तहत, लोग इन सामग्री को इधर-उधर फेंकने के बजाय निर्धारित केंद्रों पर पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ जमा कर सकेंगे। यह पहल न केवल धार्मिक आस्था का सम्मान करेगी, बल्कि शहर में फैलने वाले कचरे को भी नियंत्रित करेगी।
विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाब गणपति विसर्जन के दौरान दिल्ली की नदियों और प्राकृतिक जलस्रोतों पर प्रदूषण का दबाव बढ़ जाता है। इसे देखते हुए सरकार ने कृत्रिम तालाबों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि परंपराओं का पालन जरूरी है, लेकिन वह प्रकृति की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती मूर्तियों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल और रंगों से जलस्रोत प्रदूषित होते हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के दिशानिर्देशों के अनुसार, इन कृत्रिम तालाबों का उपयोग करना अनिवार्य है ताकि विसर्जन के बाद कचरे को सुरक्षित तरीके से हटाया जा सके। सरकार अब इन दिशानिर्देशों को अधिक व्यापक और सुलभ बनाने पर जोर दे रही है।
आस्था और जिम्मेदारी का मिलन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसे आस्था और जिम्मेदारी का मिश्रण बताया है। सरकार का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों को रोकना नहीं, बल्कि उन्हें इको-फ्रेंडली बनाना है। आने वाले समय में इन संग्रह केंद्रों और कृत्रिम तालाबों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लोग इस व्यवस्था को कितनी सक्रियता से अपनाते हैं।
स्वच्छ दिल्ली की ओर एक कदम त्योहारों के दौरान दिल्ली में पूजा सामग्री का भारी मात्रा में कचरा निकलता है। प्रशासन की इस नई व्यवस्था से न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का सम्मानजनक निपटान हो सकेगा, बल्कि सफाई व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने में भी मदद मिलेगी। यह पहल क्लीन दिल्ली मिशन को धार्मिक आयोजनों के साथ जोड़ने का एक बड़ा प्रयास है।
Aastha ka samman bhi. Prakriti ka sanrakshan bhi. Delhi Government is setting up Khandit Murti Collection Centres near temples across the city, offering a dignified solution for sacred idols and puja materials.
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) September 21, 2026
Artificial ponds for Ganpati Visarjan will ensure that our… pic.twitter.com/8Mx8sVbW4O
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