IIT बॉम्बे सुसाइड केस: प्रोफेसर दुल्ला के समर्थन में उतरे फैकल्टी फोरम अध्यक्ष, आरोपों को बताया निराधार
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मुंबई: IIT बॉम्बे में छात्र साहिल रविंद्र वाकोड़े की आत्महत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस बीच, संस्थान के फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. राजकुमार एस. पंत ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने साफ कहा कि प्रोफेसर दुल्ला ने परीक्षा के दौरान नियमों का पालन करते हुए कार्रवाई की थी।

जांच से पहले निष्कर्ष निकालना गलत

प्रोफेसर पंत ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया, लेकिन साथ ही सोशल मीडिया पर चल रही बहस पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पूरी जांच और तथ्यों के सामने आने से पहले ही लोग निष्कर्ष निकाल रहे हैं और पक्ष ले रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि मुंबई क्राइम ब्रांच मामले की जांच कर रही है, इसलिए हमें कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।

SC/ST सेल में कोई शिकायत दर्ज नहीं थी

जातिगत भेदभाव के आरोपों पर जवाब देते हुए प्रोफेसर पंत ने कहा कि उन्होंने डिप्टी डायरेक्टर से इस बारे में स्पष्टीकरण लिया है। उनके अनुसार, SC/ST सेल की ओर से स्पष्ट किया गया है कि पिछले तीन-चार महीनों में साहिल ने सेल से संपर्क नहीं किया था और न ही वहां कोई शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा कि औपचारिक शिकायत की बात तो दूर, छात्र सेल के पास कभी पहुंचा ही नहीं था।

प्रोफेसर दुल्ला छात्रों के हितैषी हैं

प्रोफेसर पंत ने बताया कि प्रोफेसर दुल्ला डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स हैं और उन्हें छात्रों के सुधार के लिए काम करने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा, मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूं कि वे इस तरह की हरकत करने वाले व्यक्ति नहीं हैं। जो छात्र उनके साथ काम कर चुके हैं, वे भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं।

परीक्षा में नकल पर कार्रवाई करना जिम्मेदारी

शिक्षक की भूमिका पर जोर देते हुए पंत ने कहा कि परीक्षा में अनुचित साधनों को नजरअंदाज करना अन्य ईमानदार छात्रों के साथ अन्याय होगा। यदि कोई छात्र मोबाइल का उपयोग कर रहा था, तो कार्रवाई करना शिक्षक की जिम्मेदारी और कर्तव्य का हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सोशल मीडिया के माध्यम से ही किसी शिक्षक को दोषी करार दिया जाने लगा, तो वे अपना काम कैसे कर पाएंगे।

IIT का प्रतिस्पर्धी माहौल

प्रोफेसर पंत ने स्वीकार किया कि IIT बॉम्बे का माहौल काफी प्रतिस्पर्धी है, जिससे छात्रों पर मानसिक दबाव हो सकता है। हालांकि, संस्थान ने इसके लिए वेलनेस सेल और जागरूकता कार्यक्रमों की शुरुआत की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब धैर्य रखने की जरूरत है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

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