एशियन गेम्स 2026: नागोया में भारतीय खिलाड़ियों की फजीहत, 14 घंटे तक कमरे और खाने के लिए तरसे एथलीट
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नागोया: जापान में 19 सितंबर से शुरू होने जा रहे एशियन गेम्स 2026 से पहले भारतीय खिलाड़ियों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। नागोया पहुंचे भारतीय एथलीटों को ठहरने की व्यवस्था में भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। कई खिलाड़ियों को वैध एक्रिडिटेशन होने के बावजूद 12 से 14 घंटे तक अपने कमरों का इंतजार करना पड़ा।

बिना खाने-पीने के घंटों भटकते रहे खिलाड़ी बुधवार को जब भारतीय वुशू टीम और रोइंग टीम नागोया पहुंची, तो उन्हें उम्मीद थी कि तय व्यवस्था के अनुसार उन्हें कमरे मिल जाएंगे। लेकिन वहां पहुंचने के बाद खिलाड़ी घंटों दर-दर भटकते रहे। इस दौरान न तो उन्हें पर्याप्त भोजन मिला और न ही बुनियादी सुविधाएं। खिलाड़ियों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई ठोस जानकारी नहीं दी जा रही थी।

लिस्ट में नाम गायब, कमरों की भी कमी हालात तब और बिगड़ गए जब नागोया पोर्ट पर खड़े क्रूज शिप में पहुंचने पर पता चला कि कई खिलाड़ियों और कोचों के नाम रजिस्ट्रेशन लिस्ट में ही नहीं थे। एमएमए एथलीट वरुण सान्याल ने सोशल मीडिया पर आपबीती बयां करते हुए कहा, मैं 7 घंटे से इंतजार कर रहा हूं और यह सिलसिला जारी है। बताया जा रहा है कि आयोजकों ने कमरों की संख्या का सही अनुमान नहीं लगाया, जिससे कमरे कम पड़ गए।

दूसरे खिलाड़ियों के साथ शेयरिंग का दबाव जिन कुछ खिलाड़ियों को कमरे आवंटित भी किए गए, उन्हें दूसरे एथलीटों के साथ कमरा शेयर करने के लिए मजबूर किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, आयोजन समिति ने उपलब्ध कमरों का एक बड़ा हिस्सा अनिश्चितता के चलते अन्य देशों की टीमों को आवंटित कर दिया। इससे भारतीय दल को भारी असुविधा हुई।

सिर्फ रोवर्स ही नहीं, निशानेबाज भी परेशान यह अव्यवस्था केवल रोइंग टीम तक सीमित नहीं थी। भारतीय निशानेबाजों की टीम भी इसका शिकार हुई। उन्हें जिस स्थान पर ठहरना था, उसे दूसरी टीमों को दे दिया गया। जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में किसी दूसरे होटल में शिफ्ट करना पड़ा। स्थिति इतनी गंभीर थी कि IOA के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को भी पास के होटलों में शरण लेनी पड़ी।

बड़े आयोजन पर उठा सवाल 19 सितंबर से शुरू होने वाले इस महाकुंभ में भारत के 501 एथलीट और 265 अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। खिलाड़ियों के लिए कंटेनर-स्टाइल के कमरे और क्रूज शिप पर व्यवस्था की गई है, जिस पर दक्षिण कोरिया जैसी अन्य टीमें भी आपत्ति जता चुकी हैं। एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित आयोजन से पहले सामने आई यह अव्यवस्था न केवल खिलाड़ियों का मनोबल गिरा रही है, बल्कि आयोजकों की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

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