हामिद अंसारी के बयान पर घमासान: क्या कांग्रेस अब मुस्लिम लीग माओइस्ट कांग्रेस बन गई है?
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पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक हालिया बयान ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। एक कार्यक्रम के दौरान नेहरू के विचारों का हवाला देते हुए अंसारी ने कहा था कि भारत के लिए असली खतरा कम्युनिज्म नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है। इस टिप्पणी पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला है।

सुधांशु त्रिवेदी का कांग्रेस पर बड़ा प्रहार बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि हामिद अंसारी के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस अब पूरी तरह से मुस्लिम लीग माओइस्ट कांग्रेस में तब्दील हो गई है। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी अपनी विचारधारा खो चुकी है और अब ऐसे तत्वों के साथ खड़ी है जो देश के लिए खतरा हैं।

नेहरू के विचारों का जिक्र और विवाद हामिद अंसारी ने शनिवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का उल्लेख करते हुए कहा था कि नेहरू का मानना था कि साम्यवाद के मुकाबले हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता भारत के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने एजी नूरानी की पुस्तक का हवाला देते हुए यह बात कही, जिसे बीजेपी ने सनातन परंपरा का अपमान करार दिया है।

योगी आदित्यनाथ का पलटवार नोएडा में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंसारी के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व उपराष्ट्रपति अपनी टिप्पणियों के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और उसकी सांस्कृतिक परंपराओं की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि भारत की सनातन परंपरा कभी भी खतरा नहीं हो सकती, बल्कि यह देश का आधार है।

केरल गठबंधन पर सवालिया निशान सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के केरल गठबंधन पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस जिन्ना की मुस्लिम लीग की विचारधारा वाली पार्टी के साथ मिलकर सरकार चला रही है। त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम लीग का नाम ही विभाजनकारी मानसिकता को दर्शाता है और कांग्रेस का उनके साथ हाथ मिलाना देश के इतिहास का एक काला अध्याय है।

राजनीतिक गलियारों में नई बहस हामिद अंसारी के बयान के बाद से अब राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर बहस तेज हो गई है कि क्या नेहरू के पुराने विचारों को आज के संदर्भ में इस्तेमाल करना देश की एकता के लिए सही है। एक ओर बीजेपी इसे कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति बता रही है, तो दूसरी ओर इस बयान ने वैचारिक विमर्श को एक नई दिशा दे दी है।

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