आईची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स के मैट पर जब सुचिका तरियाल फफककर रोईं, तो यह सिर्फ एक हार का दर्द नहीं था। यह उस कड़वी किस्मत का मंजर था जिसने दो साल पहले पेरिस ओलंपिक में विनेश फोगाट के साथ जो किया था, वही दोहराया। भारतीय खेल जगत के लिए यह एक और दिल तोड़ने वाला पल है।
नियमों की मार: फाइट ड्रॉ, फैसला किस्मत से
महिला पारंपरिक 60 किग्रा मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) के सेमीफाइनल में सुचिका का मुकाबला सिंगापुर की हुई हून टियो से था। मुकाबला कांटे का रहा और अंत तक दोनों के बीच कांटे की टक्कर बनी रही। जब मुकाबला ड्रॉ हुआ, तो विजेता तय करने के लिए रेफरी ने चौंकाने वाला फैसला लिया। फाइट की तकनीकी बढ़त के बजाय, सुबह किए गए वे-इन (वजन) को आधार बनाया गया।
700 ग्राम का अंतर बना विलेन
नियमों के दांव-पेच में सुचिका का गोल्ड जीतने का सपना फंस गया। एमएमए खेल महासंघ के अध्यक्ष निखिल कुंडे के अनुसार, सिंगापुर की टियो का वजन सुचिका के मुकाबले करीब 700 ग्राम कम था। इसी मामूली वजन के अंतर ने टियो को फाइनल का टिकट दिला दिया। सुचिका को मजबूरन ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा, जबकि उनकी आंखों में मौजूद आंसू इस अन्याय की कहानी बयां कर रहे थे।
संघर्ष से भरा रहा है सुचिका का सफर
हरियाणा की 36 वर्षीय सुचिका की यह हार और भी दुखद इसलिए है क्योंकि उनका खेल तक का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। महज 12 साल की उम्र में सड़क पर छेड़खानी और उत्पीड़न का सामना करने के बाद उन्होंने खुद को सुरक्षित बनाने के लिए मार्शल आर्ट्स का रास्ता चुना था।
बहुमुखी प्रतिभा: जूडो से MMA तक का दम
सुचिका सिर्फ एक एमएमए फाइटर ही नहीं हैं, बल्कि वे एक अनुभवी एथलीट हैं। उन्होंने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो और 2023 एशियाई खेलों में कुराश जैसी विधाओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। इतने वर्षों की कड़ी तपस्या और मेहनत के बाद एशियन गेम्स के सेमीफाइनल में इस तरह की हार खिलाड़ी का मनोबल तोड़ने वाली होती है।
भारतीय खेमे में निराशा
सुचिका ने मैच के बाद खुद स्वीकार किया कि उन्होंने मेडल का रंग बदलने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन नियमों की तकनीकी बाधाओं ने उनके हाथ बांध दिए। भारतीय टीम ने इस विवादास्पद फैसले को चुनौती भी दी थी, लेकिन एमएमए की नियमावली के सामने खिलाड़ी की मेहनत कहीं दबकर रह गई। फिलहाल, सुचिका ब्रॉन्ज के साथ वापस लौट रही हैं, लेकिन उनका यह दर्द खेल प्रेमियों के जेहन में लंबे समय तक रहेगा।
Through tears of raw emotion, Suchika Tariyal opens up about the years of sacrifice, perseverance and family support that carried her to a historic Bronze Medal in MMA. 🥹🥉
— Sony Sports Network (@SonySportsNetwk) September 21, 2026
Her journey, her resilience, her moment. India celebrates you, Suchika! 💙
Watch the 20th Asian Games… pic.twitter.com/yZiq1oRSQI
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