कीचड़ में फंसा जीवन , प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को बैलगाड़ी से ले जाने पर मजबूर परिजन
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खरगोन: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में बदहाल सड़कों ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। भीकनगांव इलाके के पिपलिया पंचायत में सड़क की खराब स्थिति के कारण एक गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका, जिसका नतीजा एक नवजात की असामयिक मौत के रूप में सामने आया है।

कीचड़ में फंसी लाइफलाइन घटना शुक्रवार शाम की है, जब मांगिया फलिया क्षेत्र की रहने वाली शिवानी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस को सूचना दी। एंबुलेंस गांव तक पहुंचने के लिए निकली, लेकिन कच्चे रास्ते पर फैले कीचड़ में गाड़ी फंस गई। काफी मशक्कत के बावजूद चालक एंबुलेंस को बाहर निकालने में नाकाम रहा।

बैलगाड़ी और बाइक बनी सहारा समय बीतता देख परिजन बदहवास हो गए। एंबुलेंस के फंसे होने के कारण, महिला को अस्पताल तक ले जाने के लिए ग्रामीणों ने बैलगाड़ी का सहारा लिया। कुछ दूर बैलगाड़ी से ले जाने के बाद, आगे का रास्ता दोपहिया वाहन से तय करना पड़ा। यह संघर्षपूर्ण सफर पूरी तरह से समय की बर्बादी साबित हुआ।

अस्पताल में टूट गई उम्मीद जब शिवानी को भीकनगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया गया, तो डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। लेकिन, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। महिला ने एक मृत बच्ची को जन्म दिया। इस घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

वायरल वीडियो ने उठाए सवाल सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें साफ दिख रहा है कि कैसे एंबुलेंस कीचड़ में धंसी हुई है और ग्रामीण गर्भवती महिला को बैलगाड़ी में ले जाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह वीडियो ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग ग्रामीणों का आरोप है कि मांगिया फलिया क्षेत्र में सड़क की हालत लंबे समय से जर्जर है। बारिश के मौसम में स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है, जिससे आपातकालीन सेवाएं गांव तक पहुंच ही नहीं पातीं। स्थानीय लोगों ने अब प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग की है ताकि भविष्य में किसी और मां को ऐसी त्रासदी न झेलनी पड़े।

जांच के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इस घटना को संज्ञान में लिया है। फिलहाल, इस बात की जांच की जा रही है कि सड़क की खराब स्थिति और समय पर मदद न मिलने के पीछे आखिर जिम्मेदार कौन है। क्या बुनियादी ढांचे की कमी किसी की जान लेने के लिए काफी है? इस सवाल का जवाब अब प्रशासन को देना होगा।

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