देश के प्रतिष्ठित चाय ब्रांड वाघ बकरी टी ग्रुप के चेयरमैन पीयूषभाई देसाई का 15 सितंबर को 86 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले छह दशकों से भारतीय चाय उद्योग का एक बड़ा नाम थे। उनके नेतृत्व में एक स्थानीय ब्रांड ने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी धाक जमाई।
गुजरात से वैश्विक बाजार तक सफर पीयूषभाई ने अपने कुशल नेतृत्व से वाघ बकरी चाय को गुजरात की सीमाओं से बाहर निकालकर देश भर के घरों तक पहुँचाया। आज यह ब्रांड दुनिया के 30 से अधिक देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। उनकी दूरदर्शी रणनीति का ही परिणाम है कि आज इस समूह का सालाना टर्नओवर 2,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
गांधीवादी मूल्यों और सादगी की मिसाल उनका जीवन महात्मा गांधी के सिद्धांतों से गहराई से प्रभावित था। पीयूषभाई के परिवार का गांधीजी से संबंध उनके दादा के समय से था, जब उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी से मुलाकात की थी। पीयूषभाई ने जीवन भर ट्रस्टीशिप के सिद्धांत को अपनाते हुए सादगी के साथ समाज सेवा को प्राथमिकता दी।
वाघ बकरी नाम के पीछे का गहरा दर्शन ब्रांड के नाम वाघ बकरी के पीछे एक प्रभावशाली संदेश छिपा है। पीयूषभाई अक्सर कहा करते थे कि एक ऐसी जगह जहाँ बाघ और बकरी एक साथ पानी पी सकें, वह एक अहिंसक और समरस समाज का प्रतीक है। उन्होंने अपने ब्रांड के जरिए इसी शांति और भाईचारे के संदेश को आगे बढ़ाया।
उद्योग के स्तंभ और संस्थापकों में शामिल पीयूषभाई केवल एक उद्यमी नहीं, बल्कि चाय उद्योग के संरक्षक थे। वे गुजरात टी ट्रेडर्स एसोसिएशन और फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया टी ट्रेडर्स एसोसिएशन्स (FAITTA) जैसे संगठनों के संस्थापक सदस्यों में से थे। उन्होंने भारतीय चाय बोर्ड के सदस्य के रूप में भी चार साल तक अपनी सेवाएँ दीं।
व्यापार से परे एक समाजसेवी साहित्य और समाज सेवा के प्रति उनका लगाव अटूट था। उन्होंने महात्मा गांधी और महादेवभाई देसाई की रचनाओं के अनुवाद के लिए अनुवाद फाउंडेशन की स्थापना की। इसके अलावा, 2016 से 2020 के बीच ब्लाइंड पीपल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने दृष्टिबाधित लोगों के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
हिंसा के खिलाफ बुलंद आवाज पीयूषभाई ने हमेशा मानवीय मूल्यों को व्यापार से ऊपर रखा। 2002 के गुजरात दंगों के दौरान, जब बहुत से लोग चुप्पी साधे हुए थे, तब उन्होंने खुलकर हिंसा का विरोध किया। उन्होंने शांति मार्च में हिस्सा लिया और हमेशा अहिंसक तरीके से अपनी बात रखने की वकालत की। उनके निधन से भारतीय उद्योग जगत ने एक महान मार्गदर्शक को खो दिया है।
AMA expresses deep sorrow on the passing of Shri Piyushbhai Desai, Chairman, Wagh Bakri Tea Group. His leadership, values, and enduring contributions will continue to inspire generations.
— Ahmedabad Management Association (@ama_ahmedabad) September 17, 2026
Our heartfelt condolences to the Desai family and the Wagh Bakri Group. May his soul rest… pic.twitter.com/aNhytDvcCD
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