भारत के सबसे प्रतिष्ठित बिजनेस साम्राज्य टाटा ग्रुप के 157 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा आंतरिक कलह देखने को मिला है, जिसने सरकार और नियामकों तक को चिंता में डाल दिया है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को 5 साल का एक्सटेंशन मिलने के बाद से समूह दो धड़ों में बंट गया है।
बोर्ड मीटिंग में हुआ घमासान 17 सितंबर को हुई टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में एन. चंद्रशेखरन को दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव 4-1 के बहुमत से पास किया गया। इस फैसले के खिलाफ वोट करने वाले अकेले सदस्य नोएल टाटा थे। नोएल टाटा ने इस फैसले को न केवल गलत बताया, बल्कि इसे कानूनी रूप से शून्य (Legal Nullity) करार दिया है।
क्या है वीटो और नियमावली का पेंच? विवाद की जड़ टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में है। नियमानुसार, चेयरमैन की नियुक्ति के लिए टाटा ट्रस्ट्स के दोनों नामित निदेशकों की सहमति अनिवार्य है। ट्रस्ट के दो प्रतिनिधि बोर्ड में हैं—नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन। बोर्ड मीटिंग में वेणु श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन का समर्थन किया, जबकि नोएल टाटा ने विरोध। जब स्थिति बराबरी की हुई, तो बैठक की अध्यक्षता कर रहे हरीश मनवानी ने कास्टिंग वोट का इस्तेमाल कर प्रस्ताव पास करवा लिया, जिसे नोएल टाटा अब चुनौती दे रहे हैं।
आरबीआई का फैसला बना विवाद की मुख्य वजह इस पूरे घमासान के पीछे आरबीआई का एक हालिया फैसला है। 11 सितंबर को आरबीआई ने टाटा संस की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के दर्जे से बाहर निकलने और प्राइवेट बने रहने की मांग की थी। नियमों के तहत, एक तय आकार से बड़ी कंपनी होने के नाते टाटा संस को सितंबर 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट (IPO) होना अनिवार्य है।
दो धड़ों में बंटा टाटा परिवार टाटा समूह अब दो खेमों में बंटा हुआ है:
सरकार की बढ़ी चिंता मामला इतना गंभीर हो गया है कि अब केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप करने का फैसला लिया है। टाटा ट्रस्ट के भीतर फैले इस तनाव को कम करने के लिए दो केंद्रीय मंत्री जल्द ही टाटा ग्रुप के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। 12 अगस्त को चंद्रशेखरन ने खुद पद छोड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन अब उनका दोबारा पद स्वीकार करना विवाद को और गहरा गया है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या यह विवाद कोर्ट तक जाएगा या सुलह का कोई रास्ता निकलेगा।
#WATCH | Mumbai, Maharashtra: On Tata Sons Board Meeting, Advocate H.P Ranina says, What has happened today is that the Board, by a majority of 4:1, has decided to reappoint N. Chandrasekaran - who had earlier said that he doesn t want to be reappointed but today he agreed. But… pic.twitter.com/dfe69x0nf7
— ANI (@ANI) September 17, 2026
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