लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने एक बड़ा दांव खेला है। पूर्व मंत्री और दिग्गज ओबीसी नेता प्रोफेसर रामाश्रय सिंह कुशवाहा ने करीब 13 साल के अंतराल के बाद फिर से समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में उन्होंने विधिवत सदस्यता ग्रहण की।
मुलायम सिंह यादव के बेहद करीब थे रामाश्रय रामाश्रय कुशवाहा सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे। 2013 में पार्टी छोड़ने के बाद उन्होंने भाजपा का रुख किया था। अब उनकी घर वापसी को सपा के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।
नेताजी आज भी हमारे बीच हैं पार्टी में शामिल होने के बाद भावुक होते हुए रामाश्रय ने कहा कि उन्हें आज भी महसूस होता है कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) हमारे बीच मौजूद हैं। उन्होंने अखिलेश यादव की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि राजनीति में सम्मान सबसे जरूरी है और अखिलेश यादव के नेतृत्व में उन्हें वह सम्मान मिल रहा है। उन्होंने अपने समर्थकों से 2027 में अखिलेश को सीएम बनाने के लिए अभी से जुटने का आह्वान किया।
कौन हैं रामाश्रय कुशवाहा? रामाश्रय कुशवाहा की गिनती प्रदेश के प्रमुख ओबीसी चेहरों में होती है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बसपा से की थी। 1996 में सरसौल सीट से जीतकर वे पहली बार विधानसभा पहुंचे। बाद में सपा में शामिल होकर उन्होंने न केवल राष्ट्रीय महासचिव का पद संभाला, बल्कि प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।
2013 में क्यों हुई थी दूरी? 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान रामाश्रय कुशवाहा के बयानों ने तत्कालीन सपा नेतृत्व को नाराज कर दिया था। पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया था, जिसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। 13 साल बाद उनकी वापसी कई पुराने समीकरणों को फिर से जीवित कर रही है।
2027 चुनाव पर क्या होगा असर? रामाश्रय कुशवाहा की वापसी को सपा की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कानपुर क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखने वाले कुशवाहा को पार्टी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। हालांकि, उनका प्रभाव कितना कारगर होगा, यह आने वाले समय में चुनावी रणनीतियों और क्षेत्रीय समीकरणों पर निर्भर करेगा।
*‘विश्वकर्मा जयंती’ के पावन अवसर पर आज हमने संकल्प लिया है कि पीडीए सरकार आने पर हम लखनऊ में भगवान विश्वकर्मा जी का एक भव्य मंदिर बनवाएंगे एवं उनकी जयंती पर सार्वजनिक अवकाश भी घोषित करेंगे।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) September 17, 2026
सकारात्मक निर्माण करनेवालों का सम्मान सकारात्मक लोग ही कर सकते हैं।… pic.twitter.com/2ICtv9dUZF
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