तनाव के बीच न्यूयॉर्क पहुंचेंगे ईरानी राष्ट्रपति, अमेरिका ने दी सशर्त मंजूरी
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वाशिंगटन/न्यूयॉर्क: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। बाइडेन प्रशासन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को न्यूयॉर्क आने की अनुमति दे दी है। दोनों नेता अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की हाई-लेवल बैठक में हिस्सा लेंगे।

सीमित होगा ईरानी प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी विदेश विभाग ने पुष्टि की है कि ईरान को अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ आने की इजाजत दी गई है, लेकिन यह दल पिछले वर्षों की तुलना में काफी छोटा होगा। राष्ट्रपति और विदेश मंत्री के साथ केवल बेहद जरूरी स्टाफ को ही यात्रा की अनुमति मिलेगी।

आवाजाही पर सख्त पाबंदियां वीजा मिलने के बावजूद ईरानी अधिकारियों को पूर्ण स्वतंत्रता नहीं होगी। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उनकी न्यूयॉर्क में आवाजाही संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, ईरानी मिशन, राजदूत के आवास और जेएफके हवाई अड्डे तक ही सीमित रहेगी। साथ ही, उन पर लक्जरी वस्तुओं की खरीद और अन्य गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लागू रहेंगे।

क्यों मजबूर है अमेरिका? ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अनुमति देने के पीछे 1947 का संयुक्त राष्ट्र समझौता है। इस समझौते के तहत, मेजबान देश (अमेरिका) विदेशी राजनयिकों को संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचने से नहीं रोक सकता। हालांकि, अमेरिका ने यह भी कहा है कि सुरक्षा और आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर वह भविष्य में वीजा देने या न देने का अधिकार रखता है।

फिलिस्तीनी अधिकारियों पर जारी है बैन दिलचस्प बात यह है कि एक ओर जहां ईरान को मंजूरी दी गई है, वहीं अमेरिका ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को प्रवेश देने से इनकार कर दिया है। विदेश विभाग के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अदालतों में इजरायल के खिलाफ कार्रवाई के कारण फिलिस्तीनी प्रतिनिधिमंडल पर यह पाबंदी लगाई गई है।

जंग के बीच कूटनीतिक हलचल यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब 28 फरवरी से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष जारी है। पेजेश्कियान का संयुक्त राष्ट्र में संबोधन तय है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक गतिरोध को कम करने का एक जरिया बन सकती है या फिर दुनिया को ईरान का कड़ा रुख देखने को मिल सकता है।

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