बांग्लादेश इस समय इतिहास के सबसे भीषण ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। बिजली और गैस की भारी किल्लत ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले गारमेंट उद्योग पर भी तालाबंदी का खतरा मंडराने लगा है।
बिजली का भारी संकट: 3500 मेगावाट से ऊपर का घाटा देश में बिजली की मांग 16,345 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जबकि उत्पादन मात्र 12,788 मेगावाट हो पा रहा है। बिजली की कमी 3,500 मेगावाट से अधिक हो गई है। अडानी पावर की एक यूनिट में आपूर्ति कम होने, आरएनपीएल (RNPL) प्लांट के बंद होने और गैस की कमी ने इस संकट को और विकराल बना दिया है।
अस्पतालों में टॉर्च की रोशनी में इलाज भीषण गर्मी और उमस के बीच पूरे देश में अघोषित बिजली कटौती का दौर है। ग्रामीण इलाकों में 7 से 10 घंटे की कटौती की जा रही है। अस्पतालों की स्थिति सबसे खराब है, जहां डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ को मरीजों का इलाज टॉर्च की रोशनी में करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
पुराने ढाका में गैस का चूल्हा जलाना मुश्किल पुराने ढाका में गैस का प्रेशर इतना कम हो गया है कि लोग बिल चुकाने के बावजूद चूल्हा नहीं जला पा रहे हैं। मजबूरन परिवारों को लकड़ी, केरोसिन और मिट्टी के चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न केवल जहरीले धुएं से स्वास्थ्य को खतरा है, बल्कि आग लगने का डर भी बढ़ गया है। छात्र और नौकरीपेशा लोग बिना नाश्ते के घर से निकलने को मजबूर हैं।
गारमेंट सेक्टर पर बंद होने का खतरा बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार गारमेंट उद्योग है। सितंबर से दिसंबर का समय इस उद्योग के लिए पीक सीजन होता है, लेकिन ईंधन की किल्लत से फैक्ट्रियां ठप होने की कगार पर हैं। कारोबारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अगले 3 महीनों के भीतर फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं। उद्योग जगत ने इस संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है।
संकट के मुख्य कारण
क्या भारत से मिलेगी राहत? बांग्लादेश पहले से ही भारत से लगभग 2,656 मेगावाट बिजली आयात कर रहा है। हालांकि, भारत खुद गैस का आयातक है, इसलिए गैस निर्यात करना संभव नहीं है। ट्रांसमिशन ग्रिड की सीमाओं के कारण बिजली की आपूर्ति में तुरंत बड़ी वृद्धि करना भी चुनौतीपूर्ण है। फिलहाल, भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए मिल रही डीजल की आपूर्ति ही एकमात्र सहारा बनी हुई है।
Old Dhaka’s Gas Crisis: Residents Struggle to Cook
— Bangladesh Awami League (@albd1971) September 17, 2026
Gas pressure has fallen so low across parts of Old Dhaka that residents can barely light their stoves—despite continuing to pay their monthly gas bills.
Families are being forced to rely on firewood, clay stoves, kerosene and… pic.twitter.com/5P1OftyJwY
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