क्या RBI भी बढ़ाएगा ब्याज दर? US Fed के फैसले से आपकी EMI और निवेश पर पड़ेगा सीधा असर
News Image

अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Fed) ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे पॉलिसी रेट 4 फीसदी तक पहुंच गया है। महंगाई और तेल की बढ़ती कीमतों के बीच फेड का यह फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकेत है। अब सवाल यह है कि इसका भारत, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और आपकी जेब पर क्या असर होगा।

फेड के फैसले का ग्लोबल मार्केट पर प्रभाव

जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो वैश्विक बाजारों में डॉलर की मांग बढ़ जाती है। निवेशक जोखिम भरे बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश करना सुरक्षित समझते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि दुनिया भर की उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पूंजी की निकासी हो सकती है, जिससे बाजार में दबाव बढ़ता है और डॉलर के मुकाबले स्थानीय करेंसी कमजोर हो जाती है।

क्या RBI को फेड की राह पर चलना होगा?

US Fed वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है, लेकिन RBI अपनी स्वतंत्र मौद्रिक नीति का पालन करता है। भारत और अमेरिका की अर्थव्यवस्थाएं अलग-अलग चरणों में हैं। RBI का मुख्य फोकस अमेरिकी दरों से अधिक भारत की जीडीपी ग्रोथ, महंगाई दर और घरेलू खपत पर रहता है। हालांकि, पूरी तरह से फेड को नजरअंदाज करना भी संभव नहीं है।

महंगाई और कच्चे तेल का दबाव

अगले महीने होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर सबकी निगाहें हैं। भारत में महंगाई दर अभी भी RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें (करीब 100 डॉलर प्रति बैरल) देश के आयात बिल और महंगाई को और अधिक हवा दे रही हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि RBI भी रेपो रेट में बढ़ोतरी का कड़ा फैसला ले सकता है।

आपकी EMI और निवेश पर असर

अगर RBI ब्याज दरें बढ़ाता है, तो सबसे सीधा असर आम आदमी की EMI पर पड़ेगा। होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन महंगे हो जाएंगे, जिससे आपकी मासिक किश्तें बढ़ सकती हैं। इसका एक नकारात्मक पहलू यह भी है कि शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है।

हालांकि, इसका एक सकारात्मक पक्ष भी है। जो लोग बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या बचत खातों में पैसा रखते हैं, उन्हें भविष्य में बेहतर रिटर्न मिल सकता है।

रुपये पर पड़ेगा दबाव

ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चलते डॉलर और अधिक मजबूत होगा, जिसके मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर पड़ सकता है। रुपया कमजोर होने से आयात महंगा हो जाता है, जिससे पेट्रोल-डीजल और विदेशी सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं। निवेश विशेषज्ञों के अनुसार, फेड का यह हॉकिश रुख आने वाले समय में बाजार में अनिश्चितता बढ़ा सकता है, जिससे निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

क्या ब्रिक्स समिट के दौरान शी जिनपिंग की बिगड़ी थी तबीयत? बीजिंग लौटते ही अस्पताल में भर्ती होने का दावा

Story 1

जलप्रपात में मस्ती के बीच मौत का साया: झरने की धार के साथ गिरा विशाल सांप, मची भगदड़

Story 1

पीएम मोदी का 74वां जन्मदिन: बॉलीवुड सितारों ने दी बधाई, अक्षय कुमार और रवि किशन ने खास अंदाज में किया विश

Story 1

अमेरिकी टैरिफ की तलवार: रूस से तेल खरीद पर भारत का कड़ा रुख, कहा- ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं

Story 1

लाल ग्रह का अनोखा नजारा: मंगल पर नीला होता है सूर्यास्त, धरती से छोटा दिखता है सूर्य

Story 1

क्या आज इतिहास रचेंगे 15 साल के वैभव सूर्यवंशी? अफगानिस्तान के खिलाफ प्लेइंग-11 में जगह मिलने के आसार

Story 1

पेरिस के एफिल टॉवर से दिल्ली तक छाया मोदी का 76वां जन्मदिन, देशभर में सेवा पखवाड़ा का आगाज

Story 1

पीएम मोदी के जन्मदिन पर पप्पू यादव का तीखा प्रहार, बाढ़ के बीच बेशर्म सेलिब्रेशन पर उठाए सवाल

Story 1

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद नेताओं की तबीयत बिगड़ने की खबरें फर्जी, विदेश मंत्रालय ने दी चेतावनी

Story 1

पीएम मोदी का जन्मदिन: रवि किशन से शत्रुघ्न सिन्हा तक, सितारों ने यूं दी बधाई