मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे ने टाला अनशन, फडणवीस सरकार को दिया 3 महीने का अल्टीमेटम
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बीड: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे समाजसेवी मनोज जरांगे ने अपना अनशन फिलहाल खत्म कर दिया है। सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी बातचीत के बाद उन्होंने आंदोलन को तीन महीने के लिए स्थगित करने का फैसला लिया है।

सरकार को मिली बड़ी राहत जरांगे का अनशन खत्म होने से फडणवीस सरकार ने राहत की सांस ली है। मराठा नेता अपनी मांगों को लेकर हजारों समर्थकों के साथ मुंबई कूच पर निकले थे। अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें बीड के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से उन्होंने अपना निर्णय सुनाया।

क्या है 3 महीने का डेडलाइन गेम? जरांगे ने स्पष्ट किया है कि अनशन खत्म करने का मतलब आंदोलन का अंत नहीं है। उन्होंने सरकार को 3 महीने का समय दिया है। यदि इस अवधि में मराठा आरक्षण और कुनबी सर्टिफिकेट से जुड़ी उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे दोबारा अपने समर्थकों के साथ मुंबई की ओर रुख करेंगे।

प्रशासनिक अभिलेखों पर जोर जरांगे अपनी पुरानी मांग पर अडिग हैं। वे चाहते हैं कि सरकार हैदराबाद, सातारा और औंध गजट जैसे ऐतिहासिक दस्तावेजों को आधिकारिक मान्यता दे, ताकि मराठा समुदाय को कुनबी वंशावली के आधार पर ओबीसी कोटे का लाभ मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को लिखित आश्वासन देना चाहिए कि एक भी कुनबी अभिलेख की अनदेखी नहीं की जाएगी।

सरकार का रुख और प्रतिनिधिमंडल की भूमिका बीड के पाटोदा में मंत्रियों राधाकृष्ण विखे पाटिल और दादा भुसे समेत अन्य अधिकारियों ने जरांगे से मुलाकात की। सरकार ने आश्वासन दिया कि कोल्हापुर और सातारा गजट पर काम पूरा करने में तीन-चार महीने लग सकते हैं। मंत्री विखे पाटिल ने जरांगे को सलाह दी कि वे प्रक्रिया की निगरानी के लिए अपने तीन प्रतिनिधि नियुक्त करें।

मुंबई कूच की चेतावनी बरकरार जरांगे ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने विश्वासघात किया, तो वे महिलाओं और बच्चों के साथ सीधे मुंबई पहुंचेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आंदोलन के समय और तरीकों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि सरकार किसी भी तरह की डराने-धमकाने की रणनीति को बर्दाश्त नहीं करेगी। अब गेंद सरकार के पाले में है और आने वाले 3 महीने मराठा आरक्षण की दिशा तय करेंगे।

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