100% टैरिफ का ट्रंप बम : रूस-ईरान पर कड़े कानून का भारत पर क्या होगा असर?
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अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। अमेरिकी कांग्रेस ने लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 को पास कर दिया है। इस बिल के कानून बनने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास रूस और उसके सहयोगी देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की पूर्ण शक्ति आ जाएगी।

बिल के पीछे की बड़ी मंशा

अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में यह बिल 262 के मुकाबले 159 वोटों से पारित हुआ। कांग्रेसी माइकल मैककॉल ने स्पष्ट किया कि इस कानून का मुख्य मकसद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध मशीन को आर्थिक रूप से पंगु बनाना है। वाशिंगटन का मानना है कि रूस को मिलने वाली आर्थिक मदद को रोककर ही उसे बातचीत की मेज पर लाया जा सकता है।

क्या राष्ट्रपति ट्रंप लगाएंगे 100% टैरिफ?

यह कानून राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों पर 100% टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार देता है जो रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीद रहे हैं। हालांकि, इसमें एक शर्त यह है कि जो देश अपनी गैस जरूरतों का 15% से कम हिस्सा रूस से आयात करते हैं, उन्हें राहत मिल सकती है। लेकिन भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार इस दायरे में सीधे तौर पर आ रहे हैं।

भारत के लिए ट्रेड शॉक का खतरा

भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रूसी कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार रहा है। यदि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल करते हैं, तो भारत-अमेरिका के व्यापार और ऊर्जा संबंधों में भारी अनिश्चितता आ सकती है। हालांकि बिल सीधे भारत पर कोई नया शुल्क नहीं लगाता, लेकिन यह राष्ट्रपति को भारत के साथ व्यापारिक मोर्चे पर बेहद सख्त कदम उठाने की खुली छूट दे देता है।

विरोध और चुनौतियां

डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों ने इस बिल का तीखा विरोध किया है। कांग्रेसी ग्रेगरी मीक्स का तर्क है कि ट्रंप की टैरिफ नीति ने पहले ही कई मित्र देशों को अमेरिका का दुश्मन बना दिया है, जिससे अंततः अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हुआ है।

अब सबकी निगाहें ट्रंप की डेस्क पर हैं। जैसे ही राष्ट्रपति इस बिल पर हस्ताक्षर करेंगे, यह कानून लागू हो जाएगा। इसके बाद पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी होंगी कि ट्रंप रूस पर दबाव बनाने की खातिर भारत जैसे मित्र देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों का जोखिम उठाने को तैयार हैं या नहीं।

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