मोबाइल की लत से बिगड़ा चौथी क्लास के छात्र का मानसिक संतुलन, गोरखपुर से सामने आया हैरान करने वाला मामला
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गोरखपुर शहर में बच्चों के डिजिटल व्यवहार को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। चौथी कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र की इंटरनेट एडिक्शन और उसके बाद आए व्यवहारिक बदलाव ने न केवल परिवार, बल्कि स्कूल प्रबंधन को भी बड़े फैसले लेने पर मजबूर कर दिया है।

ऑनलाइन पढ़ाई बनी मोबाइल की लत का जरिया

कोरोना काल के बाद ऑनलाइन शिक्षा के लिए बच्चे को मोबाइल दिया गया था। शुरुआत में पढ़ाई तक सीमित रहने वाला यह मोबाइल धीरे-धीरे बच्चे की लत बन गया। परिवार के अनुसार, पहले गेम खेलने की जिद और फिर मोबाइल न मिलने पर हिंसक व्यवहार करना, बच्चे की दिनचर्या का हिस्सा बन गया। बाद में बच्चा पूरी तरह से एकांतप्रिय हो गया और छिपकर मोबाइल का इस्तेमाल करने लगा।

आपत्तिजनक सामग्री ने बदला व्यवहार

मामला तब गंभीर हो गया जब परिवार ने बच्चे की ऑनलाइन गतिविधियों की जांच की। पता चला कि बच्चा इंटरनेट पर लंबे समय से वयस्कों के लिए बनी अनुचित और पोर्नोग्राफिक सामग्री देख रहा था। इसकी भयावहता तब दिखी जब उसने अपनी सात साल की बहन के साथ भी आपत्तिजनक हरकत की। घर में पकड़े जाने के बाद परिवार के होश उड़ गए।

स्कूल में भी मचा बवाल

घर के अलावा, बच्चा स्कूल में भी अजीबोगरीब हरकतें करने लगा था। उसने अपनी एक शिक्षिका का आपत्तिजनक चित्र बनाया था और सहपाठियों के साथ भी अभद्र व्यवहार किया। स्कूल प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल बच्चे के परिवार को काउंसलिंग की सलाह दी, बल्कि स्कूल से उसका नाम भी हटा दिया।

विशेषज्ञों की चेतावनी: केवल डांटना समाधान नहीं

वर्तमान में बच्चा मनोवैज्ञानिक की देखरेख में इलाज करवा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के व्यवहार में अचानक आए बदलाव को केवल जिद मानकर नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। इंटरनेट पर बिना निगरानी के परोसी जा रही सामग्री बच्चों के कोमल दिमाग पर गहरा और नकारात्मक असर डालती है।

कैसे रखें अपने बच्चों का डिजिटल भविष्य सुरक्षित?

माता-पिता के लिए यह घटना एक गंभीर चेतावनी है। केवल स्क्रीन टाइम कम करना ही काफी नहीं है, बल्कि इन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:

तकनीक शिक्षा का माध्यम है, लेकिन बिना निगरानी के यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकती है। गोरखपुर की यह घटना स्पष्ट करती है कि डिजिटल युग में माता-पिता की सक्रिय भूमिका ही बच्चों के भविष्य की सुरक्षा का एकमात्र आधार है।

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