कौन हैं नेहा बोरा? सीएम योगी पर अभद्र टिप्पणी के बाद विवादों के घेरे में आई AISA अध्यक्ष
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गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करने के बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा चर्चा में हैं। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है, जिसके चलते सियासी पारा चढ़ गया है।

कौन हैं नेहा बोरा?

नेहा बोरा मूल रूप से उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन और अंबेडकर यूनिवर्सिटी से पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वर्तमान में वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पीएचडी की शोधार्थी हैं और वामपंथी छात्र संगठन AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर सक्रिय हैं।

वह पहली बार तब चर्चा में आई थीं जब उन्होंने NEET परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। उस दौरान अपने स्वास्थ्य और वजन में गिरावट को लेकर वे काफी सुर्खियों में रही थीं। इसके अलावा, झारखंड में छात्र आंदोलन के दौरान उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा था, जहां उन पर स्याही भी फेंकी गई थी।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत 14 सितंबर को गोरखपुर के गोकुल अतिथि भवन में आयोजित Gen-Z महाजुटान कार्यक्रम से हुई। आरोप है कि इस मंच से नेहा बोरा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए गुंडा , दंगाई और लंपट जैसे शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने यूपी सरकार की बुलडोजर कार्रवाई और प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे।

घटना का वीडियो वायरल होने के बाद, वन भारत सिटिजन (OBC) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष काली शंकर यदुवंशी ने गोरखपुर के कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि नेहा बोरा ने गोरक्षपीठ और मुख्यमंत्री की गरिमा को ठेस पहुंचाई है।

मंत्रियों का कड़ा रुख

इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मंत्री नरेंद्र कश्यप ने ऐसे बयानों को ओछी राजनीति करार देते हुए कहा कि विरोध के नाम पर अभद्र भाषा का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने इस मामले में AI-जनरेटेड वीडियो के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई।

वहीं, कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने नेहा बोरा पर हमला बोलते हुए कहा कि ऐसे लोगों का राजनीतिक अस्तित्व समाप्ति की ओर है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को तवज्जो देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इनका चरित्र और संस्कार पहले भी छात्र आंदोलनों के दौरान सबके सामने आ चुके हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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