देशभर में चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल्स तक ऑनलाइन भुगतान के लिए यूपीआई (UPI) आम जनजीवन का हिस्सा बन चुका है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से फैल रहा था कि सरकार 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.5% टैक्स वसूलने की तैयारी में है। इस खबर ने आम जनता के बीच हड़कंप मचा दिया था।
बीजेपी ने अफवाहों को किया खारिज इस राजनीतिक घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी के नेता अमित मालवीय ने सामने आकर इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने ऐसा कोई टैक्स तय नहीं किया है। मालवीय ने कहा कि लोग झूठी गणनाओं के आधार पर भ्रम फैला रहे हैं। उनके अनुसार, 5,000 रुपये पर 25 रुपये या 10,000 रुपये पर 50 रुपये कटने जैसे दावे पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और इनका जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।
अधिसूचना के गलत अर्थ का नतीजा विवाद की जड़ 14 सितंबर को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी की गई एक अधिसूचना है। इस गजट अधिसूचना में कहा गया है कि 2,000 रुपये तक के यूपीआई और रूपे (RuPay) लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। जानकारों का कहना है कि इसी नियम का कुछ लोगों ने यह गलत मतलब निकाल लिया कि 2,000 से ऊपर की राशि पर टैक्स लगेगा। जबकि, सरकारी आदेश में कहीं भी 0.5% टैक्स का कोई उल्लेख नहीं है।
आम यूजर पर नहीं पड़ेगा कोई असर सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आम उपभोक्ताओं के रोजाना के लेनदेन पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) को किए जाने वाले ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त बने रहेंगे। अगर आप अपने परिवार या मित्रों को बड़ी राशि भी भेजते हैं, तो उस पर एक भी पैसा अतिरिक्त नहीं कटेगा।
टैक्स और MDR का अंतर समझना जरूरी इस पूरे भ्रम के पीछे मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को टैक्स समझ लेना है। MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है, बल्कि यह वह सेवा शुल्क है जो व्यापारी भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक या गेटवे को देते हैं। अभी बैंकों के बीच बड़े कारोबारी लेनदेन पर MDR तय करने के लिए केवल शुरुआती दौर की बातचीत चल रही है, जिसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ता।
डिजिटल इंडिया के लिए सरकार की प्रतिबद्धता भारत को कैशलेस बनाने के लिए सरकार खुद इस इकोसिस्टम को सब्सिडी दे रही है। वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के दौरान सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए करीब 8,730 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि आम जनता को यह आधुनिक सुविधा बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के मिलती रहेगी और लोगों को किसी भी अफवाह पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है।
₹2,000 से ऊपर UPI पर 0.5% टैक्स? कांग्रेस का दावा पूरी तरह झूठा है।
— Amit Malviya (@amitmalviya) September 15, 2026
₹5,000 के भुगतान पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 वसूले जाएंगे, ऐसा कोई सरकारी आदेश, टैक्स या consumer charge नहीं है।
14 सितंबर की अधिसूचना ने सिर्फ ₹2,000 तक के UPI और RuPay transactions पर zero-charge… pic.twitter.com/eZCAdLIJNK
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