पाकिस्तान का नक्शा बदलने का ऐलान! बलूचिस्तान ने पंजाब के इन इलाकों पर ठोका दावा
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नई दिल्ली: पाकिस्तान के साथ जारी आजादी की जंग के बीच रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने एक बड़ा और आक्रामक ऐलान किया है। संगठन ने औपचारिक रूप से घोषणा की है कि वह अपने उन ऐतिहासिक क्षेत्रों को वापस लेगा, जिन्हें जबरन पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में शामिल किया गया था। इस कदम से पाकिस्तान के भीतर एक नया भौगोलिक और राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है।

पंजाब के इन इलाकों पर दावा

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के अनुसार, तौंसा शरीफ, डेरा गाजी खान और राजनपुर जैसे इलाके मूल रूप से बलूचिस्तान का हिस्सा हैं। संगठन का आरोप है कि अवैध प्रशासनिक तौर पर इन्हें पंजाब में शामिल किया गया था। अब इन क्षेत्रों को बलूचिस्तान के आधिकारिक राष्ट्रीय नक्शे में फिर से जोड़ने के लिए एक विस्तृत देशव्यापी अभियान शुरू किया गया है।

एकजुट होने की अपील

संगठन ने पंजाब में रह रहे बलोच समुदायों से अपनी राष्ट्रीय पहचान को वापस पाने के लिए साथ आने की अपील की है। इनमें लेघारी, खोसा, मजारी, द्रिशाक, कैसरानी, बुजदार और जतोई जैसी प्रमुख जनजातियां शामिल हैं। बलूचिस्तान ने इन लोगों से मांग की है कि वे अपने पहचान पत्र, पासपोर्ट और स्कूली दस्तावेजों में पंजाब के बजाय बलूचिस्तान लिखने की पहल करें, ताकि ऐतिहासिक जुड़ाव को सुरक्षित रखा जा सके।

44% से बढ़कर 64% होगा बलूचिस्तान?

इस घोषणा के साथ ही बलूचिस्तान ने अपने भौगोलिक क्षेत्रफल को लेकर भी नया दावा पेश किया है। संगठन का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा अब तक बताए गए 44% क्षेत्रफल का दावा गलत और विदेशी आक्रमणकारी ताकतों की देन है। रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने दावा किया कि असल में बलूचिस्तान का क्षेत्रफल 64% है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया, गूगल और भौगोलिक संस्थानों से अपील की है कि वे भविष्य में बलूचिस्तान को इसी नए क्षेत्रफल के साथ प्रदर्शित करें।

2024 के लॉन्ग मार्च का प्रभाव

संगठन ने अपने इस फैसले को 2024 के बलोच लॉन्ग मार्च से जोड़ते हुए इसे एक बड़ी जीत बताया है। उनका कहना है कि पंजाब के अधीन रह रहे बलोच लोगों ने लॉन्ग मार्च के दौरान भारी समर्थन देकर यह साबित कर दिया है कि वे अपनी मातृभूमि में वापस शामिल होना चाहते हैं। बलूचिस्तान का मानना है कि आज छह करोड़ बलोच पहले से कहीं ज्यादा एकजुट और मजबूत हैं, जो अपनी सीमाओं की बहाली के लिए तैयार हैं।

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