UCC पर ओवैसी का तीखा हमला: भाजपा और अमित शाह देश को गुमराह कर रहे हैं
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एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के ऐलान पर कड़ा प्रहार किया है। हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओवैसी ने भाजपा के इस कदम को सीधे तौर पर भारत के 18 करोड़ मुसलमानों को निशाना बनाने की साजिश करार दिया।

संविधान के लिए खतरा है UCC

ओवैसी ने आरोप लगाया कि यूसीसी नाम पर भाजपा, अमित शाह और आरएसएस जबरन हिंदू कानूनों को अन्य धर्मों के लोगों पर थोप रहे हैं। ओवैसी के अनुसार, यह कदम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 25 (धार्मिक स्वतंत्रता), 26 और 29 का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि देश की असल खूबसूरती इसकी विविधता में है, जिसे भाजपा खत्म करना चाहती है।

गोवा में लागू करके दिखाएं

गृह मंत्री अमित शाह को चुनौती देते हुए ओवैसी ने कहा कि अगर भाजपा सच में यूसीसी को लेकर गंभीर है, तो वे गोवा में इसे लागू करके दिखाएं। उन्होंने कहा, वे उत्तराखंड, गुजरात और असम में इसे लागू करने की बात करते हैं, लेकिन गोवा में इनका रुख अलग क्यों है? जो लोग मुसलमानों के खिलाफ जहर उगलते हैं, वे गोवा को लेकर चुप क्यों हैं? वे पागल हैं और दुनिया को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

गोवा के कानून पर उठाए सवाल

ओवैसी ने गोवा में पहले से मौजूद यूसीसी के कथित दोहरेपन की ओर इशारा किया। उन्होंने दावा किया कि गोवा के मौजूदा कानूनों में हिंदू और कैथोलिक समुदाय के लिए कई विशेष छूट दी गई हैं।

उन्होंने सवाल किया कि क्या भाजपा इन विशेष प्रावधानों को हटाकर देश भर में एक समान कानून लाएगी, या फिर यह सिर्फ अल्पसंख्यकों को परेशान करने का जरिया है?

विधि आयोग भी खिलाफ

एआईएमआईएम प्रमुख ने याद दिलाया कि मोदी सरकार द्वारा गठित विधि आयोग (Law Commission) ने भी अपनी रिपोर्ट में यह कहा था कि वर्तमान में देश को यूसीसी की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, आपके शासित राज्यों में लव जिहाद कानून क्यों हैं? डिस्टर्ब एरिया एक्ट क्यों है जहां एक हिंदू किसी मुसलमान को जमीन नहीं बेच सकता? यह सब समानता के सिद्धांतों के विपरीत है।

बता दें कि अमित शाह के 2029 से पहले भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने के ऐलान के बाद से ही विपक्षी दलों में खलबली मची है। जहाँ ओवैसी ने इसे मुस्लिम विरोधी बताया है, वहीं एनडीए की सहयोगी जेडीयू (नीतीश कुमार की पार्टी) ने भी बिहार में इसे लागू करने से साफ इनकार कर दिया है।

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