हूतियों का बदला रूप: चप्पल से AI मिसाइल तक का खौफनाक सफर
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यमन के हूती विद्रोही कभी पहाड़ों में चप्पल पहनकर लड़ने वाले गुरिल्ला लड़ाकों के रूप में जाने जाते थे, लेकिन सितंबर 2026 तक आते-आते वे वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं। लाल सागर के मोचा पोर्ट और पेरिम द्वीप पर कब्जे के बाद, हूतियों ने दुनिया के 12% व्यापारिक रास्ते बाब अल-मंदेब पर अपना शिकंजा कस लिया है।

कात का नशा और आक्रामकता का रहस्य हूतियों के गालों में फंसी कात (Khat) की पत्तियां अक्सर चर्चा का विषय रहती हैं। यह एक उत्तेजक पौधा है जिसे यमन में घंटों चबाया जाता है। इसमें मौजूद कैथिनोन और कैफीन लड़ाकों को कुछ समय के लिए ऊर्जा और सतर्कता देते हैं, लेकिन यह उनकी कोई सैन्य तकनीक नहीं, बल्कि यमन की पुरानी सामाजिक परंपरा है। हालांकि, लंबे समय तक इसके सेवन से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं भी होती हैं।

चप्पलों में छिपी गुरिल्ला ताकत उग्रवादियों का पारंपरिक कुर्ता और चप्पल पहनना उनकी ग्रामीण-पहाड़ी पृष्ठभूमि को दर्शाता है। एक धार्मिक आंदोलन से शुरू हुआ यह संगठन शुरुआत से ही नियमित सेना की तरह नहीं था। पहाड़ों में छिपकर वार करने और स्थानीय आबादी में घुलने-मिलने की कला ने उन्हें पारंपरिक सेनाओं के लिए पकड़ पाना नामुमकिन बना दिया है। उनके लिए नंगे पैर या चप्पल पहनकर लड़ना उनकी पहचान और रणनीतिक लचीलेपन का हिस्सा है।

AI से मिसाइलों को स्मार्ट बनाने की कोशिश हूतियों की तकनीक अब ईरान से आगे निकलती दिख रही है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, हूती लड़ाकों ने Claude AI जैसे सॉफ्टवेयर का उपयोग अपनी मिसाइलों और रॉकेटों के गाइडेंस सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए किया है। हालांकि, AI की मदद से हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने का उनका प्रयास अभी शुरुआती चरणों में है और अक्सर विफल रहा है, लेकिन यह दर्शाता है कि वे अब तकनीकी रूप से कितने खतरनाक हो चुके हैं।

वैश्विक शक्तियां सीधी भिड़ंत से क्यों कतरा रही हैं? हूतियों की असली ताकत उनके पास मौजूद ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा है, जो 2,000 किमी तक मार कर सकते हैं। यही कारण है कि अमेरिका, सऊदी अरब और इजराइल जैसे देश सीधे सैन्य टकराव से बच रहे हैं। बाब अल-मंदेब पर नियंत्रण और ईरानी समर्थन ने हूतियों को एक ऐसी स्थिति में ला दिया है जहां उनसे उलझना सीधे तौर पर एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध को न्योता देना है।

फिलहाल, विश्व की महाशक्तियां इस पहाड़ी गुरिल्ला सेना को सीधे सैन्य कारवाही की जगह कूटनीतिक रूप से रोकने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन हूतियों का बढ़ता विस्तार वैश्विक व्यापार के लिए एक गंभीर संकट बना हुआ है।

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