नमस्ते भारत! : इजरायली राजदूत ने हिंदी में दी बधाई, बोले- दो प्राचीन भाषाएं जो आज भी हैं जीवित
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भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने हिंदी दिवस के विशेष अवसर पर देशवासियों को अनोखे अंदाज में बधाई दी है। 14 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी कर उन्होंने हिंदी भाषा के प्रति अपना गहरा लगाव जाहिर किया।

सीखने का सफर और हिंदी का महत्व राजदूत अजार ने अपने वीडियो संदेश में कहा, नमस्ते भारत, मेरा नाम रूवेन अजार है। मैं भारत में इजरायल का राजदूत हूं। जब मैं दो साल पहले भारत आया था, तब मैंने हिंदी सीखना शुरू किया था। उन्होंने अपनी टूटी-फूटी लेकिन स्पष्ट हिंदी में देशवासियों को इस दिन की शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने अपने पोस्ट में हिंदी और हिब्रू भाषाओं का जिक्र करते हुए लिखा, दो प्राचीन भाषाएं, जो आज भी पूरी तरह से जीवित हैं। इजरायल की ओर से उन्होंने भारत के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया।

क्यों मनाया जाता है 14 सितंबर को हिंदी दिवस? हिंदी दिवस का इतिहास भारत के संविधान से सीधे तौर पर जुड़ा है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी महत्वपूर्ण फैसले की याद में हर साल आज के दिन हिंदी दिवस मनाया जाता है।

क्या हिंदी भारत की राष्ट्रीय भाषा है? अक्सर लोगों के बीच हिंदी की स्थिति को लेकर भ्रम रहता है। संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत हिंदी को संघ की राजभाषा का दर्जा प्राप्त है, लेकिन इसे संविधान में राष्ट्रीय भाषा का दर्जा नहीं दिया गया है। भारत की व्यापक भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए संविधान में सभी भाषाओं के संरक्षण के प्रावधान किए गए हैं।

बढ़ता दायरा समय के साथ-साथ हिंदी का प्रभाव प्रशासन के अलावा शिक्षा, मीडिया, साहित्य और डिजिटल संचार के क्षेत्र में काफी बढ़ा है। आज हिंदी न केवल भारत बल्कि वैश्विक मंचों पर भी अपनी पहचान मजबूत कर रही है। विदेशी राजनयिकों का हिंदी के प्रति यह आकर्षण भाषा की बढ़ती लोकप्रियता और स्वीकार्यता का प्रमाण है।

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