भारत और चीन के बीच करीब छह साल से जारी तनाव के बाद अब रिश्तों में एक नई हलचल दिखाई दे रही है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई 50 मिनट की द्विपक्षीय मुलाकात ने वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। भारत के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के विकास की बुनियादी शर्त है। हालांकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से हालात बहुत जटिल रहे हैं, लेकिन कजान में हुई चर्चा के बाद सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया से थोड़ी राहत मिली है।
यह मुलाकात अचानक नहीं थी। इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच आठ बिंदुओं पर सहमति बनी थी। इसमें दो नई सैन्य हॉटलाइन और सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने जैसे महत्वपूर्ण फैसले शामिल थे। मोदी-जिनपिंग की बातचीत इसी कूटनीतिक आधार को आगे बढ़ाने वाली रही है।
सीमा के साथ-साथ व्यापार भी चर्चा का बड़ा केंद्र रहा। साल 2025-26 में भारत ने चीन से 132 अरब डॉलर का आयात किया, जिससे व्यापार घाटा भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। भारत अब केवल कारोबार बढ़ाने के बजाय व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन और भारतीय कंपनियों की बाजार में पहुंच पर जोर दे रहा है।
क्या यह मुलाकात रिश्तों को पूरी तरह सामान्य कर देगी? विशेषज्ञों का मानना है कि अभी इसे स्ट्रैटेजिक रीसेट कहना जल्दबाजी होगी। हालांकि सीधी उड़ानें शुरू होना और नाथू ला के रास्ते व्यापार का बहाल होना सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अभी भी एक बड़ी बाधा है।
वैश्विक स्तर पर बदलती अर्थव्यवस्था और अमेरिका की अनिश्चित व्यापार नीतियों ने दोनों देशों को एक-दूसरे के करीब आने पर मजबूर किया है। ग्लोबल साउथ के नेतृत्व की दौड़ और आर्थिक स्थिरता के लिए भारत और चीन का सहयोग अब एक मजबूरी और जरूरत दोनों बन गया है।
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता (इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और सोलर उपकरण) को कम करने और अपनी एमएसएमई कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की है। यह मुलाकात महज एक औपचारिक शुरुआत है; असली परीक्षा इस बात की होगी कि आने वाले महीनों में सीमा, व्यापार और भरोसे के मुद्दों पर जमीन पर कितना बदलाव आता है।
#WATCH दिल्ली: BRICS समिट 2026 | BRICS सदस्य देशों के लिए बंद कमरे में हुई बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाथ मिलाया और एक-दूसरे से बातचीत की।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 12, 2026
(वीडियो: DD न्यूज) pic.twitter.com/vv5ZbfBwB5
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