दिल्ली BRICS बाजार में छाईं ईरानी राष्ट्रपति की बेटी जहरा पेजेश्कियान, सादगी और ज्ञान के कायल हुए लोग
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नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के बीच एक चेहरा इन दिनों काफी चर्चा में है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की बेटी जहरा पेजेश्कियान इन दिनों अपनी सादगी और सक्रियता के कारण सुर्खियां बटोर रही हैं। 12 सितंबर को जब वह अपने पति हसन मजीदी के साथ दिल्ली के ब्रिक्स बाजार पहुंचीं, तो वहां मौजूद हर किसी की नजरें उन पर टिक गईं।

क्या था जहरा का दिल्ली दौरा?

नई दिल्ली स्थित नेशनल क्राफ्ट्स म्यूजियम में लगे ब्रिक्स बाजार में जहरा पेजेश्कियान का स्वागत केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने किया। इस दौरान जहरा ने न केवल भारतीय मंडप का दौरा किया, बल्कि वहां के हथकरघा और ग्रामीण महिला कारीगरों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों में गहरी रुचि दिखाई। जहरा का यह दौरान यह दर्शाता है कि कैसे ब्रिक्स मंच केवल राजनीतिक समझौतों तक सीमित न रहकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी माध्यम बन रहा है।

कौन हैं जहरा पेजेश्कियान?

जहरा केवल राष्ट्रपति की बेटी ही नहीं, बल्कि एक उच्च शिक्षित और प्रभावशाली व्यक्तित्व हैं। उन्होंने ईरान की प्रतिष्ठित शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से पेट्रोकेमिकल्स/केमिस्ट्री में मास्टर्स और पीएचडी की है। राजनीति में आने से पहले, वह ईरान की प्रमुख जाम पेट्रोकेमिकल कंपनी में कार्यरत थीं।

1993 में एक सड़क हादसे में अपनी मां और भाई को खोने के बाद, जहरा ने अपने पिता के साथ एक अनोखा भावनात्मक बंधन साझा किया है। मसूद पेजेश्कियान ने तब से दोबारा शादी नहीं की और अपने तीनों बच्चों की परवरिश खुद की। जहरा, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अपने पिता की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरीं और चुनाव प्रचार की रणनीति से लेकर मीडिया प्रेजेंटेशन तक में अहम भूमिका निभाई।

फर्स्ट लेडी की भूमिका में जहरा

ईरान में राष्ट्रपति की पत्नी के न होने के कारण, जहरा अक्सर आधिकारिक कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल निभाती हुई नजर आती हैं। चाहे SCO सम्मेलन हो या अन्य अंतरराष्ट्रीय दौरे, वह अपने पिता के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनकर वैश्विक मंचों पर ईरान का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनके पति हसन मजीदी, जो कि फाइनेंस विशेषज्ञ हैं, भी उनके साथ हर कदम पर नजर आते हैं।

ब्रिक्स बाजार में ईरानी कला का जलवा

ब्रिक्स बाजार में ईरान की संस्कृति की भी झलक देखने को मिली। वहां नादिया करीमी और आमनेह सेदिघी द्वारा लगाए गए स्टॉल्स पर बलोची कढ़ाई (दोच) और रश्ती कढ़ाई (रश्ती-दूजी) का प्रदर्शन किया गया। जहरा ने इन स्टॉल्स पर जाकर ईरानी कारीगरों का हौसला बढ़ाया और प्राचीन कला को आधुनिक डिजाइनों के साथ जोड़ने के प्रयासों की सराहना की।

जहरा पेजेश्कियान का यह दौरा न केवल एक कूटनीतिक यात्रा थी, बल्कि यह ईरान की समृद्ध विरासत और एक आधुनिक, शिक्षित ईरानी महिला की छवि को दुनिया के सामने रखने का एक प्रभावी जरिया भी साबित हुआ।

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