ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: शी जिनपिंग के साथ दिल्ली आए चीन के दो सबसे शक्तिशाली पावर ब्रोकर
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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। सात साल बाद भारत आए शी जिनपिंग के साथ उनके दो सबसे भरोसेमंद और प्रभावशाली रणनीतिकार—काई ची और वांग यी—भी मौजूद हैं। आज शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

कौन हैं जिनपिंग के राइट हैंड काई ची? 70 वर्षीय काई ची कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं। उन्हें शी जिनपिंग का सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगी माना जाता है। काई ची पार्टी के जनरल ऑफिस के डायरेक्टर के रूप में पूरे सरकारी तंत्र को नियंत्रित करते हैं।

फुजियान और झेजियांग प्रांतों के समय से ही काई ची, शी जिनपिंग के साथ काम कर रहे हैं। 2017 में जब उनका कद तेजी से बढ़ा, तभी से वे शी की कार्यशैली और रणनीतियों को अमलीजामा पहनाने वाले मुख्य सूत्रधार बन गए हैं।

कूटनीति के मंझे हुए खिलाड़ी: वांग यी चीनी विदेश मंत्री वांग यी पिछले एक दशक से अधिक समय से बीजिंग की विदेश नीति के केंद्र में हैं। वांग यी की भारत यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत करने वाले चीन के प्रमुख प्रतिनिधि हैं।

अगस्त 2025 में वांग यी ने भारत आकर एनएसए अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ वार्ता की थी। उनका साथ होना यह दर्शाता है कि चीन सीमा पर चल रहे तनाव को कम करने और रिश्तों को स्थिर करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर ठोस बातचीत का इच्छुक है।

सात साल बाद दिल्ली में नई उम्मीद? चीनी राष्ट्रपति की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक है। लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद के बीच, यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों को पुनर्जीवित करने का एक अवसर हो सकता है।

शी जिनपिंग के साथ उनके दो सबसे प्रभावशाली सहयोगियों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि बीजिंग इस बार केवल ब्रिक्स सम्मेलन तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि नई दिल्ली के साथ कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर बातचीत को गंभीरता से आगे बढ़ाना चाहता है।

आज शाम 5.45 बजे होने वाली प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय वार्ता तय करेगी कि आने वाले समय में भारत और चीन के संबंधों की दिशा क्या होगी।

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