1212 खंभे, 1200 मीटर कॉरिडोर और 22 कुंड: ब्रिक्स सम्मेलन में चमकी रामेश्वरम की भव्य विरासत
News Image

दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान एक तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत किया, तो उनके पीछे रामेश्वरम के ऐतिहासिक रामनाथस्वामी मंदिर की भव्य तस्वीर लगी थी। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति जिनपिंग को इस प्राचीन द्रविड़ वास्तुकला के चमत्कार से परिचित कराया।

रामेश्वरम: आस्था और इतिहास का संगम तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित यह मंदिर न केवल भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, बल्कि यह चार धामों में भी शामिल है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंका पर चढ़ाई करने से पहले भगवान श्रीराम ने यहीं शिवलिंग स्थापित कर पूजा की थी।

वास्तुकला का रहस्य: 1212 खंभे मंदिर का तीसरा गलियारा 1,212 नक्काशीदार खंभों पर टिका है। इसके पीछे एक गहरा गणित और आध्यात्म है। विशेषज्ञों के अनुसार, 12 (ज्योतिर्लिंग) और 101 (पवित्र संख्या) का गुणनफल 1,212 होता है। हर खंभे पर की गई नक्काशी अद्वितीय है, जो उस दौर के शिल्पकारों के कौशल को दर्शाती है।

दुनिया का सबसे लंबा कॉरिडोर मंदिर का 1200 मीटर (1.2 किमी) लंबा गलियारा दुनिया के सबसे लंबे मंदिर रास्तों में गिना जाता है। इसका निर्माण केवल भव्यता के लिए नहीं, बल्कि भक्तों को बाहरी दुनिया से काटकर पूरी तरह आत्मिक शांति और ईश्वर में लीन करने के उद्देश्य से किया गया था। 17वीं-18वीं सदी में सेतुपति राजाओं ने इसे समुद्री हवाओं और चक्रवातों से बचाने के लिए अभेद्य रूप दिया था।

22 पवित्र कुंडों का रहस्य इस परिसर में 22 दिव्य कुंड (तीर्थ) हैं। माना जाता है कि ये कुंड देश की प्रमुख नदियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इन कुंडों में स्नान करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि इनका औषधीय जल शारीरिक व्याधियों को भी दूर करता है।

शिव और विष्णु का दुर्लभ मिलन रामनाथस्वामी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका धार्मिक समन्वय है। यहां शैव और वैष्णव परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यही कारण है कि यह स्थान शिव भक्तों और राम भक्तों के लिए समान रूप से श्रद्धा का केंद्र है।

एकाश्म नंदी और भव्य गोपुरम मंदिर परिसर में एक ही चट्टान को तराशकर बनाई गई 17 फीट ऊंची नंदी की प्रतिमा स्थित है। साथ ही, इसका 126 फीट ऊंचा पूर्वी गोपुरम द्रविड़ स्थापत्य कला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। बारीक नक्काशी से सजे ये प्रवेश द्वार आज भी अपनी प्राचीन गरिमा को जीवंत बनाए हुए हैं।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

यूरोप में छिपे गैंगस्टर का गेम ओवर : मोल्दोवा से दबोचा गया जग्गू भगवानपुरिया गैंग का शातिर अमृतपाल

Story 1

भागलपुर: कुत्ते से टकराकर सड़क पर गिरे बाइक सवार के लिए देवदूत बनी डायल-112

Story 1

जोधपुर के छोरे का कमाल: सुनील गावस्कर के साथ कमेंट्री बॉक्स में गूंजेगी देवेंद्र की आवाज

Story 1

भागलपुर में भाजपा नेता की हत्या: एसएसपी ने संभाली कमान, पूर्व पार्षद समेत दो पर एफआईआर

Story 1

गजब! रूसी डिप्लोमेट ने फर्राटेदार हिंदी में की BRICS की तारीफ, जबरदस्त अंदाज हुआ वायरल

Story 1

MPSC पेपर लीक: आदित्य ठाकरे का राजभवन में बड़ा कदम, न्यायिक जांच और इस्तीफे की मांग से गरमाई सियासत

Story 1

80s के लुक में दिखना चाहते हैं आप भी? वैभव सूर्यवंशी की तरह अपनी AI फोटो बनाने का आसान तरीका

Story 1

WCL सीजन 3 का ऐलान: दुबई में भिड़ेंगे युवराज और अफरीदी, जारी हुआ पूरा शेड्यूल

Story 1

रील के चक्कर में मौत से मुकाबला: सोनमर्ग में सिंध नदी के बीच फंसी स्कॉर्पियो, मची अफरा-तफरी

Story 1

भयंकर बारिश का अलर्ट: ओडिशा में अगले 24 घंटे भारी, तूफानी हवाओं और बाढ़ का खतरा