ब्रिक्स का नई दिल्ली घोषणापत्र : भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, आतंकवाद और टैरिफ पर सख्त तेवर
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ब्रिक्स (BRICS) देशों का बहुप्रतीक्षित साझा घोषणापत्र जारी कर दिया गया है। नई दिल्ली घोषणापत्र के नाम से जारी इस दस्तावेज पर किसी भी सदस्य देश ने आपत्ति नहीं जताई है, जिसे भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। इस घोषणापत्र में ग्लोबल साउथ की आवाज को मुखर किया गया है।

आतंकवाद पर कड़ा रुख घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई है। ब्रिक्स देशों ने आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने और उनकी फंडिंग पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि आतंकवाद को किसी धर्म विशेष से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। भारत के लिए इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

टैरिफ और वैश्विक व्यापार पर चिंता ब्रिक्स देशों ने अमेरिका जैसे विकसित देशों द्वारा बार-बार दी जा रही एकतरफा टैरिफ की धमकियों पर गंभीर चिंता जताई है। साझा पत्र में सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और ग्लोबल ट्रेड को सुचारू बनाए रखने के लिए सामूहिक सहयोग की अपील की गई है। यह कदम वैश्विक अर्थतंत्र में स्थिरता लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

पीएम मोदी का मंत्र: नियम मानने वाले नहीं, नियम बनाने वाले बनें शिखर सम्मेलन के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा कि अब समय आ गया है कि ग्लोबल साउथ नियमों को मानने वाला (Rule-taker) बनने के बजाय नियम तय करने वाला (Rule-maker) बने। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह एक समावेशी मंच है।

संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक संस्थाओं में सुधार पीएम मोदी ने यूएन सुरक्षा परिषद सहित वैश्विक संस्थाओं में सुधार की वकालत की। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक ढांचा एक पदानुक्रमित पिरामिड जैसा है, जहां निर्णय लेने की शक्ति कुछ चुनिंदा देशों के हाथ में है। मोदी ने ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म के लिए 10 सूत्रीय प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव दिया, जिसे अगले शिखर सम्मेलन तक रोडमैप के रूप में लागू किया जाएगा।

ईरान और समुद्री सुरक्षा पर संदेश प्रधानमंत्री ने ईरान और अन्य सदस्य देशों को संदेश देते हुए सप्लाई चेन की सुरक्षा पर बल दिया। उन्होंने नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सदस्य देशों के बीच एक नाविक नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव भी रखा, ताकि भविष्य में युद्ध या तनाव की स्थिति में ऊर्जा और संसाधनों की आपूर्ति बाधित न हो।

ये दिग्गज रहे मौजूद इस शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शीर्ष नेता शामिल हुए। पीएम मोदी ने सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब इन संकल्पों को ठोस नतीजों में बदलने का समय आ गया है।

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