तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 28 साल के इतिहास में सबसे बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हो गया है। पार्टी का आधिकारिक नाम और प्रतिष्ठित जोड़ाफूल (घास-फूल) चुनाव चिह्न इस समय चुनाव आयोग की दहलीज पर है। बागी नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी दावेदारी पेश कर ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
‘जो ममता कहें, वही सही’ वाली राजनीति के खिलाफ बगावत दिल्ली में चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, बंगाल में एक ही कहावत चल रही थी—न खाता न बही, जो ममता बनर्जी कहें वही सही। लेकिन अब पार्टी नियमों और दस्तावेजों के आधार पर चलेगी। ऋतब्रत का दावा है कि उनके पास बहुसंख्यक विधायकों का समर्थन है, इसलिए असली टीएमसी वही हैं।
नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर सियासी बिसात आगामी नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर ऋतब्रत ने एक अनोखा और चुनौतीपूर्ण दांव खेला है। उन्होंने घोषणा की कि उनका गुट नंदीग्राम से अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि ममता बनर्जी निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला करती हैं, तो वे उनके सम्मान में अपना प्रत्याशी वापस ले लेंगे। यह बयान ममता की राजनीतिक साख पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
16 सितंबर की डेडलाइन और चुनाव आयोग का गणित नंदीग्राम उपचुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 16 सितंबर है। चुनाव आयोग के सामने कानूनी संकट यह है कि एक ओर ममता बनर्जी पार्टी की संस्थापक होने का दावा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी के पास 60 से अधिक विधायकों का लिखित समर्थन है। सुप्रीम कोर्ट के सादिक अली केस के सिद्धांतों के अनुसार, आयोग को अब संगठनात्मक और विधायी समर्थन का आकलन करना होगा।
क्या फ्रीज हो जाएगा चुनाव चिह्न? कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि 16 सितंबर से पहले आयोग किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाता है, तो जोड़ाफूल सिंबल को अस्थायी रूप से फ्रीज किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में दोनों गुटों को नए नाम और नए चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे।
बंगाल की राजनीति में यह जंग अब केवल आपसी कलह नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन गई है। नंदीग्राम का रण और चुनाव आयोग का आगामी फैसला ही तय करेगा कि तृणमूल कांग्रेस की विरासत का असली वारिस कौन होगा।
#WATCH | Delhi: West Bengal LoP Ritabrata Banerjee says, I cannot disclose what talks happened; it was very fruitful. They had many queries; we answered them and showed some documents. They had asked for those documents to be submitted. We will be doing that. So we are hopeful… https://t.co/wx9A8N8IoB pic.twitter.com/omlrB0Rltm
— ANI (@ANI) September 12, 2026
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