7 साल बाद भारत आ रहे शी जिनपिंग: क्या मोदी-शी की मुलाकात से जमी बर्फ पिघलेगी?
News Image

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आज नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रही यह यात्रा भारत-चीन संबंधों में एक नया मोड़ साबित हो सकती है। 2020 की गलवान झड़प और उसके बाद के सैन्य गतिरोध को देखते हुए पूरी दुनिया की नजरें इस दौरे पर टिकी हैं।

एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल साथ ला रहे हैं शी चीनी राष्ट्रपति अपने साथ करीब 400 लोगों का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल लेकर आ रहे हैं। यह संख्या 2019 में उनके पिछले दौरे के मुकाबले दोगुनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों का साथ आना, इस बात का संकेत है कि चीन द्विपक्षीय बातचीत को लेकर गंभीर है और कूटनीतिक स्तर पर संबंधों को सामान्य करने का प्रयास कर रहा है।

आज शाम 5:45 बजे होगी मोदी-शी की मुलाकात आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, शी जिनपिंग दोपहर 12:30 बजे दिल्ली पहुंचेंगे। इसके बाद वे भारत मंडपम में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय वार्ता शाम 5:45 बजे भारत मंडपम में ही होगी। इस बैठक से पहले दोनों नेता ब्रिक्स सम्मिट की अन्य गतिविधियों, जैसे फैमिली फोटो और पौधारोपण कार्यक्रम में भी साथ दिखेंगे।

सीमा विवाद और रिश्तों की स्थिरता पर जोर भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि चीन के साथ संबंधों में सामान्य स्थिति तभी बहाल हो सकती है, जब सीमावर्ती इलाकों में पूरी तरह शांति हो। गलवान झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच कटुता बढ़ी है, लेकिन हालिया महीनों में कूटनीतिक स्तर पर हुई बातचीत ने उम्मीदें जगाई हैं। भारत और चीन के बीच यह लगातार तीसरा साल होगा जब दोनों नेता संवाद करेंगे।

क्या है चीन का रुख? भारत में चीनी राजदूत शू फीहोंग ने संकेत दिया है कि बीजिंग द्विपक्षीय संबंधों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देख रहा है। उन्होंने कहा कि चीन मतभेदों को सुलझाने और आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। कजान और तियानजिन की मुलाकातों के बाद, दिल्ली में होने वाली यह बैठक रणनीतिक दिशा तय करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

वैश्विक मंच पर ब्रिक्स की अहमियत नई दिल्ली में आयोजित यह समिट न केवल भारत-चीन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और वैश्विक मुद्दों पर साझा सहमति बनाने का भी एक बड़ा जरिया है। इस सम्मेलन में सदस्य देशों के अलावा कई अतिथि देश भी शामिल हो रहे हैं, जिससे भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका और भी मजबूत होगी।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

मोदी-जिनपिंग की अहम मुलाकात से पहले चीन का बड़ा संदेश, कहा- पुराने मतभेद सुलझाएंगे

Story 1

लाल बत्ती वाली गाड़ी से JEE सेंटर पहुंचे थे अर्जुन, परीक्षा में फेल होने के बाद प्रोफेसर बनकर लौटे IIT बॉम्बे

Story 1

BRICS शिखर सम्मेलन: आज दिल्ली की सड़कों पर न निकलें बिना तैयारी, ये रास्ते रहेंगे बंद

Story 1

ब्रिक्स समिट में अशांति फैलाने की साजिश नाकाम: पन्नू के इशारे पर काम करने वाले तीन गिरफ्तार

Story 1

थाली में उतरी नन्ही चिरैया : आंटी और पक्षी के भरोसे का वीडियो देख लोग हुए भावुक

Story 1

जसप्रीत बुमराह का बदला और वैभव सूर्यवंशी का संघर्ष: नेट प्रैक्टिस में क्या हुआ?

Story 1

भारत और चीन के बीच फिर शुरू होगी सीधी उड़ान, शी जिनपिंग के दौरे के बीच बड़ी राहत

Story 1

अपनी ही जमीन पर मेहमान बनेगी टीम इंडिया: पहली बार बदलेगा ड्रेसिंग रूम

Story 1

सावधान! आज 20 राज्यों में डबल अटैक का अलर्ट: 75 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, भारी बारिश की चेतावनी

Story 1

ब्रिक्स समिट में पीएम मोदी की दो-टूक: ग्लोबल साउथ संकटों की फ्रंट रो में, लेकिन निर्णय लेने में सबसे पीछे