सीतापुर: थाने पहुंचे मंत्री राकेश राठौर, कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर छलके आंसू; बोले- वर्कर्स सेफ नहीं तो संघर्ष का क्या मतलब?
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सीतापुर: उत्तर प्रदेश के नगर विकास राज्य मंत्री राकेश राठौर गुरु गुरुवार शाम उस समय सुर्खियों में आ गए जब वे अपने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में सीतापुर की कोतवाली पहुंच गए। थाने के भीतर अपने समर्थकों की स्थिति को देखकर मंत्री भावुक हो गए और भरे मंच से उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

क्या है पूरा मामला? विवाद की शुरुआत बुधवार को रम्पा महल इलाके में सड़क चौड़ीकरण के दौरान हुई। अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान नगर पालिका के अधिकारियों और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी हो गई। अधिकारियों से दुर्व्यवहार के आरोपों के चलते पुलिस ने कुछ बीजेपी कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद तनाव बढ़ गया।

पहली बार थाने की दहलीज पर आया हूं कोतवाली पहुंचे मंत्री राकेश राठौर ने कहा कि अपने पूरे जीवन में वे पहली बार किसी मामले को लेकर पुलिस स्टेशन आए हैं। उन्होंने कहा, मैं 4 साल क्या, जब से मेरा जीवन शुरू हुआ है, तब से पहली बार कोतवाली आया हूं। मंत्री ने साफ कहा कि आज वे जिस मुकाम पर हैं, उसमें पार्टी कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेतृत्व का बड़ा योगदान है।

अधिकारियों के आश्वासन पर भड़के मंत्री राठौर ने बताया कि वे दोपहर 4 बजे से ही नगर पालिका की ईओ और कोतवाली प्रभारी से लगातार संपर्क में थे। उन्हें कार्यकर्ताओं को छोड़ने का आश्वासन दिया गया, लेकिन देर शाम तक कुछ नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि आश्वासन के सिवाय उन्हें कुछ नहीं मिला।

कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं तो राजनीति बेकार भावुक होते हुए मंत्री ने कहा, अगर मेरा कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं है, तो इस राजनीति और संघर्ष का क्या मतलब रह जाता गया है? मैंने अपना पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया है। उन्होंने अपने करीबी साथी जितेंद्र मिश्रा और अन्य कार्यकर्ताओं का जिक्र करते हुए प्रशासन से संवेदनशीलता बरतने की अपील की।

क्या बोले अधिकारी? दूसरी ओर, एडिशनल एसपी (नॉर्थ) आलोक कुमार सिंह ने इसे सामान्य घटनाक्रम करार दिया। पुलिस का कहना है कि अतिक्रमण हटाते समय स्थिति बिगड़ी थी, जिस पर काबू पाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस के अनुसार, शुरुआत में उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि हिरासत में लिए गए लोग बीजेपी कार्यकर्ता हैं।

प्रशासन से माफी की गुहार मंत्री ने यह भी जोड़ा कि यदि बातचीत के दौरान कार्यकर्ताओं की ओर से कोई अभद्र भाषा इस्तेमाल की गई है, तो वे व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को युवाओं की भावनाओं को समझते हुए संयम बरतना चाहिए था। फिलहाल, यह मामला सीतापुर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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