दुनिया सबसे जटिल दौर से गुज़र रही है; ईरान के राष्ट्रपति ने ब्रिक्स के सामने रखा बड़ा सवाल
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नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) बिज़नेस फ़ोरम के दौरान वैश्विक चुनौतियों और आर्थिक सहयोग पर गहन मंथन हुआ। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालातों पर चिंता जताते हुए ब्रिक्स देशों के बीच आपसी समन्वय को और मज़बूत करने का आह्वान किया।

जटिल दौर और ब्रिक्स का जवाब

राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने कहा कि आज दुनिया सप्लाई चेन की बाधाओं और आर्थिक हथकंडों के उपयोग से उपजे सबसे कठिन दौर से गुज़र रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स की असली शक्ति केवल सदस्य देशों की अर्थव्यवस्था के आकार में नहीं, बल्कि इस क्षमता को व्यापार, निवेश और संयुक्त फ़ाइनेंसिंग के एक मज़बूत नेटवर्क में बदलने में निहित है। उन्होंने संभावित सहयोग से निकलकर वास्तविक सहयोग की ओर कदम बढ़ाने पर जोर दिया।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स का बढ़ता दबदबा

ब्राज़ील के विदेश मंत्री मौरो विएरा ने ब्रिक्स के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आज ब्रिक्स सदस्य दुनिया के कुल आर्थिक उत्पादन का 40% हिस्सा हैं। वैश्विक जीडीपी में कम और मध्यम आय वाले देशों की भागीदारी 20% से बढ़कर 50% से अधिक हो गई है। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था संरक्षणवाद और एकतरफा प्रतिबंधों का सामना कर रही है, सदस्य देशों के बीच तालमेल और भी जरूरी हो गया है।

20 वर्षों में 6 गुना बढ़ा ब्रिक्स का निर्यात

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स की आर्थिक प्रगति के आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि 2003 में ब्रिक्स देशों का वैश्विक निर्यात लगभग 900 बिलियन डॉलर था, जो 2024 में बढ़कर 6 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। इसके साथ ही वैश्विक निर्यात में ब्रिक्स की हिस्सेदारी 12% से उछलकर 24% तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा इस समूह की बढ़ती व्यापारिक क्षमता का प्रमाण है।

महिला उद्यमियों और MSME पर विशेष ध्यान

इस फ़ोरम में केवल बड़े व्यापारिक समझौतों पर ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर के बदलावों पर भी चर्चा हुई। ब्रिक्स बिज़नेस काउंसिल ने 44 से अधिक सुझावों के साथ अपनी रिपोर्ट पेश की है। साथ ही, ब्रिक्स विमेंस बिज़नेस अलायंस ने महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत रूपरेखा तैयार की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का जोर इस बात पर है कि इन आर्थिक लाभों का सीधा असर किसानों, युवा उद्यमियों, MSME क्षेत्र और महिलाओं को सशक्त बनाने में हो।

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