ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पर्सनल आर्मी से न्यूक्लियर ब्रीफकेस तक, पुतिन की अभेद्य सुरक्षा का पूरा खाका
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दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में शुमार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब भी किसी विदेशी धरती पर कदम रखते हैं, तो उनके साथ महज कूटनीति नहीं, बल्कि एक पूरा सुरक्षा साम्राज्य साथ चलता है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली पहुंचे पुतिन के लिए भारत और रूस की एजेंसियों ने एक अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार किया है।

पर्सनल आर्मी : FSO और SBP का घेरा पुतिन की सुरक्षा का जिम्मा फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस (FSO) की एक विशेष इकाई प्रेसिडेंशियल सिक्योरिटी सर्विस (SBP) के पास है। यह एजेंसी पूर्व केजीबी (KGB) का आधुनिक स्वरूप है। FSO में करीब 50,000 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जो अमेरिकी सीक्रेट सर्विस से करीब 6 गुना ज्यादा है। पुतिन के साथ हमेशा 30 हथियारबंद गार्ड साये की तरह रहते हैं, वहीं भीड़ में तैनात सैकड़ों एजेंट आइसक्रीम वेंडर से लेकर आम नागरिकों के भेष में हर हलचल पर नजर रखते हैं।

सुरक्षा का चार-स्तरीय चक्रव्यूह पुतिन की सुरक्षा को चार परतों में बांटा गया है:

  1. पहला घेरा: पर्सनल बॉडीगार्ड्स जो उनके बिल्कुल करीब रहते हैं।
  2. दूसरा घेरा: सादे कपड़ों में छिपे हुए सीक्रेट एजेंट।
  3. तीसरा घेरा: बाहरी लोगों को दूर रखने वाली सुरक्षा टीम।
  4. चौथा घेरा: ऊंची इमारतों पर तैनात स्नाइपर्स, जो किसी भी खतरे को दूर से ही नेस्तनाबूद करने में सक्षम हैं।

भारत में 4-लेयर सुरक्षा कवच दिल्ली में पुतिन के लिए रूस के SBP कमांडो, भारत के NSG कमांडो और दिल्ली पुलिस मिलकर काम कर रही है। पूरे रूट को डिजिटल निगरानी, AI-आधारित फेशियल रिकग्निशन और जैमर्स से लैस किया गया है। रूस से आए चार दर्जन से अधिक सुरक्षा विशेषज्ञों ने दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर पूरे इलाके को सैनिटाइज किया है।

रोलिंग बंकर और फ्लाइंग क्रेमलिन पुतिन की ऑरस सीनेट लिमोसिन को रोलिंग बंकर कहा जाता है, जो बम और केमिकल हमलों को झेलने में सक्षम है। हवा में, पुतिन फ्लाइंग क्रेमलिन (IL-96-300PU विमान) का उपयोग करते हैं, जो परमाणु हमले के आदेश देने के लिए एक उड़ते हुए कमांड सेंटर की तरह काम करता है। सुरक्षा के लिहाज से वे कभी अकेले नहीं उड़ते, बल्कि उनके साथ दो बैकअप विमान भी साथ चलते हैं।

पूप सूटकेस और खाने की कड़ी निगरानी पुतिन की सुरक्षा के सबसे चौंकाने वाले हिस्से में मल-मूत्र ब्रीफकेस शामिल है। विदेशी दौरों पर उनके मल-मूत्र को सुरक्षित वापस रूस ले जाया जाता है ताकि कोई विदेशी एजेंसी उनकी सेहत का राज न जान सके। उनका खाना भी रूसी शेफ ही तैयार करते हैं, जिसे बॉडीगार्ड्स पहले खुद चखते हैं। साथ ही, उनके पास हमेशा चेगेट नामक न्यूक्लियर ब्रीफकेस रहता है, जिससे परमाणु हमले के निर्देश दिए जा सकते हैं।

बढ़ती चुनौती, बढ़ती सुरक्षा 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद से पुतिन की सुरक्षा को कई गुना बढ़ा दिया गया है। उनके निकटतम स्टाफ के लिए सेल फोन का इस्तेमाल वर्जित है और हर व्यक्ति को मिलने से पहले कड़ी स्क्रीनिंग से गुजरना पड़ता है। रूसी राष्ट्रपति की यह सुरक्षा व्यवस्था न केवल तकनीक, बल्कि गोपनीयता का भी एक अनूठा संगम है।

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